त्वरित टिप्पड़ी ! गठबंधन की ‘गांठ’ खोल गए नेताजी !जितेंद्र तिवारी स्वतंत्र लेखक

16वीं लोकसभा के आखिरी सत्र में नेताजी का प्रधानमंत्री मोदी के तारीफ में कशीदे पढ़ना बुआ और बबुवा के बीच पनपे राजनैतिक गठबंधन की भीतरी ‘गांठ’ को उधेड़ गया। नेताजी का यह भाषण 2019 के चुनाव से पहले ही गठबंधन के लिए चुनौती बन गया। खुले शब्दो मे प्रधानमंत्री मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने का उदबोधन कर नेताजी ने यूपी में बने गठबंधन पर कहीं न कहीं सीधा प्रहार किया जो माया और अखिलेश को कतई रास नही आएगा। क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी दोबारा प्रधानमंत्री न बने इसी कामयाबी को हासिल करने के लिए 2019 की राजनीतिक विसात की एक बड़ी गोटी के तौर पर सपा और बसपा का गठबंधन उत्तरप्रदेश में पनपा जिसको अमली जामा पहनाने के लिए सक्रिय तौर पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ही पहल करी इससे भी इंकार नही किया जा सकता। तो क्या ये माना जाय कि यूपी में बुआ- बबुवा गठबंधन को नेताजी का भीतरी आशीर्वाद प्राप्त नही है? अगर है तो जो बबुवा को नही पसन्द वो नेताजी को कैसे पसन्द हो गया! यानी गठबन्धन को मोदी पसन्द नही और नेताजी को मोदी पसन्द है…! तो ये माना जाय कि 2019 के आम चुनाव में अभी नेताजी का सियासी तड़का बाकी है!

टिपण्णी-प्रहलाद तिवारी(स्वतंत्र लेखक)

कहते हैं देश की सरकार का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है।तो वहां इस वक्त हर कोई पैर गड़ाने में लगा है।अखिलेश यादव प्रयागराज जाने नहीं दिए जाने से नाराज बैठे हैं। सपाई सड़क पर फसड़ काटे हैं. योगी जी डंडा चलवा रहे हैं। मायावती ट्वीट कर रही है।राहुल-प्रियंका रोडशो कर रहे हैं।पर एक आदमी इस घमासान से बाहर दिख रहा था।गायब दिख रहा था।जिन्हें कुछ धरतीपुत्र तो कुछ लोग नेताजी कहके बुलाते हैं। यूपी की सियासत के धुरंधर मुलायम सिंह यादव। वो एक बार फिर चर्चा में हैं. अपनी उसी क्लासिकल धोभीपछाड़ के लिए. पर इस बार ये धोभीपछाड़ पहलवान रहे मुलायम ने अपने बेटे को ही दे दिया है।

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