कुछ लोग दस्तावेज नहीं दिखाएंगे, लेकिन रामलला का सबूत मांगेगे : केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद

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बड़ौदा में शनिवार को इंडिया फस्र्ट फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में अपने फैसले में तीन महत्वपूर्ण बातें कही थीं. पहला गिराया गया ढांचा ही ‘भगवान राम का जन्मस्थान है’ हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है. दूसरा ‘मुस्लिम पक्ष विवादित जमीन पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा. मस्जिद में इबादत में व्यवधान के बावजूद साक्ष्य यह बताते हैं कि प्रार्थना पूरी तरह से कभी बंद नहीं हुई. मुस्लिमों ने ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया, जो यह दर्शाता हो कि वे 1857 से पहले मस्जिद पर पूरा अधिकार रखते थे’ और तीसरा ‘एएसआई की रिपोर्ट का हवाला देकर कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद के नीचे जो ढांचा था वह इस्लामिक ढांचा नहीं था. ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था’.”

रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा, “राम मंदिर के स्थान को हिंदू भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं. मुस्लिम भी विवादित जगह के बारे में यही कहते हैं. प्राचीन यात्रियों द्वारा लिखी किताबें और प्राचीन ग्रंथ दर्शाते हैं कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है. ऐतिहासिक उद्धहरणों से संकेत मिलते हैं कि हिंदुओं की आस्था में अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है.”

रविशंकर प्रसाद का कहना था, “हिन्दू इस स्थान को रामलला का जन्मस्थान मानते थे इसका बात का उल्लेख संस्कृत, अंग्रेजी और फारसी भाषा के लेखों में मिलता है. इतना सब कुछ होने के बावजूद इस मामले को अदालत के बाहर स्वीकार करने में क्या हर्ज था कि वहां राम मंदिर था और है.”

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