अयोध्या : मवई को कुपोषण मुक्त करने में मददगार बनेगी रामायण कालीन तमसा

तमसा के उद्गम स्थल से आठ किलोमीटर तक नदी के दोनों बंधो पर तैयार किए जा रहे सहजन के पेड़,तकनीकी सहायक आशीष तिवारी ने बताया कि मवई ब्लॉक क्षेत्र में तमसा के तट पर कुपोषण को भगाने के लिए 4 हजार पौध हो रहे तैयार।

मवई(अयोध्या) ! वर्षो से अपने अस्तित्व को बचाने की गोहार लगा रही रामायण कालीन तमसा नदी को जिले के अफसरों ने एक बार फिर जीवन दायिनी बनाने में जुटे है।मनरेगा योजना द्वारा तमसा की खुदाई के बाद इसको अविरल करने के लिए अफसर लगातार नई नई तरकीब लगा रहे है।इतना ही नही इसे जीवनदायिनी बनाने के लिए नदी के दोनों बंधो पर करीब 4 हजार सहजन के पेड़ लगवाए है।जो आने वाले समय मवई ब्लॉक सहित पूरे रुदौली क्षेत्र के लोगों के लिए आहार का साधन बनेगी साथ ही लोगों को कुपोषण मुक्त करने में भी मददगार सिद्ध होगी।

मवई ब्लॉक के तकनीकी सहायक आशीष तिवारी ने बताया डीसी मनरेगा नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी के निर्देश पर जिले के मवई ब्लाक को कुपोषण मुक्त करने की कवायद विगत वर्ष ही शुरू कर दी गई थी।कुपोषण को दूर करने के लिए तमसा नदी के उद्गम स्थल बसौड़ी से आठ किलोमीटर तक नदी के दोनों बंधो पर पोषण वाटिका बनाये जाने की कार्ययोजना तैयार की गई थी।इस योजना के तहत दोनों बंधो पर लगभग चार हजार सहजन के पौध रोपित किए गए थे।अब ये पौध लगभग एक वर्ष से अधिक समय के हो गए है।आगामी वर्षाकाल के बाद कुछ पौधों में फल आने भी शुरू हो जाएंगे।और आने वाले एक दो वर्षों में औषधीय गुणों से भरपूर सहजन की भारी मात्रा में फल तैयार होंगे।जिसका उपयोग कर निश्चित रूप से ये पूरा क्षेत्र कुपोषण मुक्त होगा।

पौष्टिक गुणों की खान है सहजन

तकनीकी सहायक आशीष तिवारी ने बताया आयुर्वेद में सहजन के पौध को पौष्टिक गुणों की खान बताया गया है।इसकी जड़ से लेकर फूल फल पत्ती तना सब बहुत फायदेमंद है।इसी फली व पत्तियों में भारी मात्रा विटामिन सी ए बी कैल्शियम पोटैशियम मैग्नीशियम आयरन प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।जो सेहत के लिए बहुत ही लाभकारी है।डीसी मनरेगा नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने बताया कि तमसा नदी के बंधो पर रोपित किए गए सहजन के पौधों का बहुत तेजी से विकास हुआ है।इस वर्ष भी सहजन सहित अन्य कई औषधीय पौध तमसा के बंधो पर रोपित किए जाएंगे।

विगत वर्ष बसौड़ी नर्सरी पर तैयार किए गए थे 25 हजार पौध

रुदौली के उप बन क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि विगत वर्ष बसौड़ी पौधशाला पर सहजन के करीब 25 हजार पौध तैयार किए गए थे।जो तमसा नदी के तट सहित आस पास गांवो के प्रधानों में वितरित कर लगवाया गया था।इन्होंने बताया लगभग तीन वर्षों में ये पौध फल देने लगेंगे।जिनके सेवन से लोग कुपोषण मुक्त हो सकते है।

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