बाराबंकी: गुजरात से लौटे 82 साल के वृद्ध को होम क्वारंटाइन में रखा अकेले, मौत के बाद शव में पड़े कीड़े

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बाराबंकी. कोरोनावायरस (Coronavirus) को रोकने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर अभियान छेड़े हुए हैं. इसी क्रम में अन्य के राज्यों से आए हुए लोगों की दशा को देखकर उन्हे क्वारंटाइन भी किया जा रहा है. जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं, लेकिन बाराबंकी (Barabanki) से होम क्वारनटाईन (Home Quarantine) की ऐसी खबर सामने आई है जिसको सुन कर किसी का हृदय दहल उठेगा. यहां एक वृद्ध को होम क्वारनटाईन किया गया था. शनिवार को उसका मृत शरीर उसी के घर में मिला. मौत हो जाना तो सामान्य बात है मगर जब मृत शरीर में कीड़े पड़ जाएं तो प्रशासन पर सवाल उठना लाजमी है. अब प्रशासन के रवैये पर सवाल भी उठ रहे हैं.

22 मार्च को होम क्वारंटाइन किया था

बाराबंकी जनपद के थाना मोहम्मदपुर खाला इलाके के गांव बढ़नापुर में शनिवार को एक वृद्ध की मौत हो गई. वृद्ध कुछ सप्ताह पूर्व गुजरात से बाराबंकी आया था. प्रशासन ने एहतियात के लिए उसे 22 मार्च को होम क्वारंटाइन किया था और बाहर नही निकलने या बाहरी व्यक्ति से न मिलने का फरमान सुनाया था. कल जब उसके घर से तेज दुर्गन्ध आई तो ग्रामीणों ने प्रशासन को इसकी खबर दी. मृतक के पड़ोसियों की माने तो दुर्गन्ध इतनी तेज थी कि लोगों का खड़ा होना मुश्किल हो रहा था. ग्रामीण जब किसी तरह से मृत शरीर के पास पहुंचे तो शव से कीड़े रेंगते दिखाई दिए. इसका मतलब साफ़ था कि उसे मरे हुए कुछ दिन हो गए थे.

ग्रामीण कहते हैं कि जब से प्रशासन ने होम क्वारनटाईन किया था तबसे भयवश वह लोग उधर जाते ही नही थे. कभी-कभी राशन इत्यादि लेते जाते समय वह लोग उन्हें देख लेते थे. ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शरीर पर कीड़े इस कदर थे कि वह दीवारों पर भी रेंगने लगे थे. इस सबसे यह लगता है कि उनकी मौत काफी पहले ही हो चुकी थी.

4 अप्रैल को नोटिस चस्पा करने गई थी आशा बहू

गांव की आशा बहू ने हमें बताया कि वह 22 तारीख को जब क्वारंटाइन किया गया था तब वह आयी थी और फिर उसके बाद वह 4 अप्रैल को घर के दरवाजे पर नोटिस चस्पा करने आई थी. इस दौरान उन्हें किसी अनहोनी की भनक भी नहीं थी.।यह वृद्ध अकेले घर में रहते थे और इनकी उम्र लगभग 82 वर्ष थी. अपने जिद्दी स्वभाव के कारण वह अपना खाना भी खुद ही बनाते थे. अब उनकी मृत्यु कब हुई यह साफ नहीं है, लेकिन 4-5 दिन पहले जरूर इनकी मृत्यु हुई होगी. तभी कीड़े पड़े अन्यथा दो दिन की मृत्य में कीड़े नहीं पड़ सकते.

स्थानीय महिला ग्राम प्रधान के पति महेन्द्र वर्मा ने बताया कि मृतक अपने पौत्र के साथ गुजरात से गांव आया था, क्योंकि इसके प्रपौत्र का मुण्डन था. यह अपना खाना खुद बनाते थे और एक अप्रैल को उनके यहां से राशन भी लेकर गए थे. दिनांक 4 अप्रैल को बेलहरा के निवासी डॉक्टर बृजेश के यहां से अपनी दवा भी लेकर आये थे. वह दमे के मरीज थे. अब इनकी मृत्यु कब हुई यह बता पाना सम्भव नहीं है, लेकिन इनकी मृत्यु को काफी समय जरूर हो गया था. अपनी लापरवाही मानते हुए महेन्द्र वर्मा कहते है कि वह पिछले कई दिनों से दूसरे कामों में उलझे हुए थे इसी कारण मृतक की ओर ध्यान नही दे पाए.

बाराबंकी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रमेश चन्द्रा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मृतक गुजरात से आया था और उसे होम क्वारंटाइन किया गया था. जिसकी मृत्यु हो गयी है. जहां तक देख रेख की बात है तो आशा बहू जाती होगी और बाहर से हाल-चाल जानकर वापस हो जाती होगी. कीड़े पड़ने के लक्षणों के बारे में अभी कुछ नही कहा जा सकता. उसको कोरोना के लक्षण नहीं थे, परन्तु फिर भी हमने उसका सैम्पल लेकर भेज दिया है. जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह पाना सम्भव होगा.

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