वोट न डालने से उठने लगे हैं तेजस्वी के नेतृत्व क्षमता पर सवाल


पटना। मतदान के अंतिम चरण में पटना साहिब से वोट न डालने के कारण नेता प्रतिपक्ष व लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव विपक्षियों के निशाने पर आ गए हैं।इसके कारण उनकी राजनीतिक कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। रविवार को उनकी मां व बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने वेटेनरी कॉलेज में मतदान के बाद यह खुलासा किया था कि तेजस्वी यादव इसलिए वोट डालने नहीं आ रहे हैं क्योंकि उनका फोटो उनके वोटर आईडी कार्ड के फोटो से मैच नहीं हो रहा है। यानि उनके वोटर आईडी कार्ड पर किसी और का फोटो लगा हुआ है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि उनका फोटो उनके वोटर आई कार्ड से मैच नहीं कर रहा था तो उन्होंने समय रहते इसे दुरुस्त क्यों नहीं करवाया ? नेता प्रतिपक्ष लोगों से अपनी पार्टी के साथ महागठबंधन के घटक दलों के उम्मीदवारों के पक्ष में एक- एक वोट के लिए लोगों से अपील कर रहे थे, खुद अपने वोटर आई कार्ड को लेकर इतने उदासीन कैसे रह सकते हैं।
मतदान के दिन भी अगर वह अपना वोटर आई कार्ड लेकर मतदान केंद्र पर पहुंच जाते तो उन्हें वोट देने से कोई नहीं रोक सकता था। खुद बिहार के मुख्य निवार्ची पदाधिकारी एच एस श्रीनिवास ने बताया कि मतदाताओं के वोटर आई कार्ड में गड़बड़ी की कई शिकायतें उनके पास आई थीं। इन शिकायतों को देखते हुये उन मतदाताओं को वोट देने की इजाजत दे दी गई थी। जिन लोगों के पास वोटर कार्ड था चाहे उसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी क्यों न हो उन्हें वोट देने से नहीं रोका गया। गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने अपने वोटर आई कार्ड के साथ मतदान केंद्र पर भी जाने की जहमत नहीं उठाई थी, जबकि उस दिन कई मतदाता अपने वोटर आई कार्ड के साथ जिनमें कुछ न कुछ गड़बड़ी थी अपना वोट देने के लिए मतदान केंद्रों पर दस्तक दे रहे थे और चुनावकर्मी हर स्तर पर उनकी सहायता कर रहे थे। लेकिन तेजस्वी यादव के दिमाग में एक बार भी यह ख्याल नहीं आया कि मतदान के दिन उन्हें मतदान केंद्र पर मौजूद होकर अपना वोट देने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना चाहिए था। अगर एक मतदाता के तौर पर वह थोड़ा सचेत रहते तो इसकी भी नौबत नहीं आती। अपने वोटर आई कार्ड में समय रहते वह सहजता से करेक्शन करवा सकते थे।
बहरहाल वोट न देने की वजह से तेजस्वी यादव पर उनके विरोधी दल के लोग भी जमकर तंज कस रहे हैं। भाजपा के प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने ट्वीटर पर चुटकी लेते हुये कहा कि भाई तेजस्वी ने अपने मताधिकार का उपयोग इसलिए नहीं किया क्योंकि उनके परिवार से कोई प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार सामने नहीं था और वे महागठबंधन का चेहरा राहुल गांधी को हकीकत में नहीं मानते हैं। राजद ने सरेंडर कर दिया। इस मुद्दे पर जदयू ने सवाल खड़ा किया है। जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने अपने ट्वीटर पर लिखा है कि ट्वीटर बबुआ तेजस्वी अपने पिता लालू यादव को जेल से निकालने के लिए वोट मांगते घूमे। परन्तु खुद नही वोट दिए ! क्या अब ये खुद नहीं चाहते कि लालू यादव जेल से निकलें ? मजे की बात है कि बात -बात पर ट्वीट करने वाले तेजस्वी यादव खुद इस मसले पर पूरी तरह से खामोश हैं। इसका नकारात्मक प्रभाव उनके समर्थकों पर भी पड़ रहा है। उनके समर्थक भी दबी जुबान से यह कहने लगे हैं कि किसी मामले पर भाषणबाजी करना अलग बात है और तकनीकी तौर पर चीजों को दुरुस्त करना अलग। जब वह तकनीकी गड़बड़ी की वजह से खुद अपना वोट नहीं डाल पा रहे हैं तो अपने उन समर्थकों का वोट कैसे हासिल कर पाएंगे जो इस तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं या फिर उन्हें इस तरह की समस्याओं से निजात पाने के लिए कैसे प्रेरित करेंगे।

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