Kkc राजरंग ! रामनगरी का चुनावी महासंग्राम,त्रिकोणीय मुकाबले में ध्रुवीकरण की आस-जितेंद्र तिवारी की रिपोर्ट

निर्दलीय बिगाड़ सकते है समीकरण,भाजपा व गठबंधन के वोटों में तगड़ी सेंधमारी

जितेन्द्र तिवारी (स्वतंत्र पत्रकार)

अयोध्या ! प्रभु राम की नगरी अयोध्या में इसबार की सियासी लड़ाई दिलचस्प हो चली है। कभी समूचे देश की सियासत का केंद्र बिंदु बनी अयोध्या में इसबार का सियासी अखाड़ा पूरी तरह त्रिकोणीय हो चला है। रामनगरी वासी इसबार कड़े मुकाबले के दिलचस्प जंग के अहम भागीदार बनने जा रहे है। राममंदिर के इर्दगिर्द घूमती सियासत में इसबार विकास का भी शोर है। आस्था के साथ जातीय समीकरण साधने की कोशिश भी है। पांचवे चरण के मुकाबले की अहम सीट बनी फैजाबाद में भाजपा को अपना किला बचाने की चुनौती है तो कांग्रेस को खोई जमीन साधने की तलाश वही सपा बसपा के साथ मिलकर सोशल इंजीनरिंग का फार्मूला सेट करने की जुगत में गठबंधन की उम्मीदवारी ! यानी देश की नामचीन लोकसभा सीट पर हर वो विसात बिछाने की जद्दोजहद है जिससे लोकतंत्र के मंदिर में दस्तक दी जा सके। हर वो उमीदवार उम्मीद की टकटकी से रामनगरी की बादशाहत पाने के लिए एडी-चोटी का जोर लगा मतदाता की चौखट पर दस्तक दे रहा है लेकिन इसबार का मतदाता मुखर नही है।वह मौके की नजाकत को समझते हुए चुप्पी साधे है।जीत किस करवट बैठेगी यह तो 23 मई को परिणाम आने पर ही पता चलेगा। पिछले बार के विजेता रहे लल्लू सिंह इसबार फिर मैदान में है तो कांग्रेस ने 2009 में जीत हासिल करने वाले निर्मल खत्री पर दांव लगाया है वही गठबंधन उमीदवार के तौर पर सपा से आनन्द सेन यादव को मैदान में उतारा है। इसबार के मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर राजन पाण्डेय भी ताल ठोक रहे जबकि एक रिटायर्ड आईएएस पूर्व जिलाधिकारी विजयशंकर पांडेय भी सियासत की सड़कें नाप रहे है। अब ये किसके लिए नफा या किसका करेंगे नुकसान ये तो वक्त बताएगा? फिलहाल इतना तो तय है कि ये सियासी गुणा भाग से समीकरण बिगाड़ने में पूरी तरह सक्षम है। जो जीत हार का समीकरण बना व बिगाड़ सकते है। माना जाता है कि ओबीसी बाहुल्य क्षेत्र फैजाबाद में मुस्लिम व सवर्ण वोटर जीत हार का फार्मूला तय करते रहे है। जिसमें ब्राह्मण व पासी वोटरों का खाँसा प्रभाव माना जाता रहा है।कांग्रेस इधर लगातार भाजपा व गठबंधन के वोटों में सेंधमारी कर रही है।वही निर्दल प्रत्यासी राजन पांडेय भी अपने प्रचार प्रसार का ग्राफ बढ़ाकर दलीय प्रत्याशियों को तगड़ा नुकसान कर रहे है। जिसको भांपते हुए प्रत्याशी नफा-नुकशान साधने की पुरजोर कोशिश कर रहे है। समय कम है चरणवन्दना जोरो पर है। जातिगत आंकड़ो के साथ सियासी जुगलबन्दी का दौर है बड़े बड़े नेता क्षेत्रो में जनसभा से लेकर नुक्कड़ सभा तक कर रहे है। हर एक उम्मीदवार को जीत की उम्मीद है मुकाबला दिलचस्प है मतदाता मस्त है 6 मई को किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी और 23 मई को भाग्य की विजय पताका लहरायेगी तो इंतजार करिए परिणाम दिवस का और मतदान अवश्य करिए मतदान दिवस पर। मतदाता तेरी जय हो!

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