राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची मोदी सरकार, कहा- ‘मंजूरी दें जिससे जल्द मंदिर निर्माण शुरू हो सके’

अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद को लेकर मोदी सरकार भी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक्शन में आ गई है. मंगलवार को मोदी सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर. याचिका में गैर विवादित भूमि को रामजन्मभूमि न्यास को सौपने की अपील की गई है.

केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि अयोध्या में जो गैर विवादित भूमि है, उसे रामजन्मभूमि न्यास को वापस सौंप दिया जाए. वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि जिस भूमि पर राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद है वह सुप्रीम कोर्ट अपने पास रखे.

बता दें कि सरकार की ओर से मंशा जाहिर की गई है कि गैर विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को सौंपी जाए, ताकि उस हिस्से पर मंदिर निर्माण प्रारम्भ हो सके. आज ही सुप्रीम कोर्ट में इस मसले को लेकर सुनवाई होनी थी, लेकिन जस्टिस बोबडे के छुट्टी पर जाने की वजह से सुनवाई टल गई.

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अयोध्या में हिंदू पक्षकारों को जो हिस्सा दिया गया है, वह रामजन्मभूमि न्यास को दे दिया जाए. जबकि 2.77 एकड़ भूमि का कुछ हिस्सा भारत सरकार को लौटा दिया जाए.

मालूम हो कि अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के आसपास की करीब 70 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के पास है. इसमें से 2.77 एकड़ की जमीन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था. जिस भूमि पर विवाद है वह जमीन 0.313 एकड़ ही है. 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने इस जमीन पर स्टे लगाया था, और किसी भी तरह की एक्टविटी करने से इनकार किया था.

सरकार का कहना है कि इस जमीन को छोड़कर बाकी जमीन भारत सरकार को सौंप दी जाए. मोदी सरकार का कहना है कि जिस जमीन पर विवाद नहीं है उसे वापस सौंपा जाए.

गौरतलब है कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन वह टल गई. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पांच जजों की पीठ कर रही है. जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस एस. ए. बोबडे और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ शामिल हैं.

कैसे हुआ था जमीन का बंटवारा?
आपको बता दें कि 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अयोध्या विवाद को लेकर फैसला सुनाया था. जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांट दिया था.जिस जमीन पर राम लला विराजमान हैं उसे हिंदू महासभा, दूसरे हिस्से को निर्मोही अखाड़े और तीसरे हिस्से को सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया गया था.

गौर करने वाली बात है कि लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर निर्माण का मुद्दा गर्माता जा रहा है. राष्ट्रीय स्वयंसेवस संघ, विश्व हिंदू परिषद समेत उनके अन्य संगठनों के द्वारा लगातार मोदी सरकार पर मंदिर निर्माण के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

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