सीएम योगी का अल्टीमेटम, 10 जनवरी तक छुट्टा जानवरों को पहुंचाएं गो संरक्षण केंद्र नहीं तो कार्यवाई

गो संरक्षण को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर और सख्त नजर आ रहे हैं. सीएम योगी ने गोवंश के संरक्षण के लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं. सीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी अधिकारियों को 10 जनवरी तक सभी छुट्टा जानवरों को गो संरक्षण केंद्रों में पहुंचाने का निर्देश दिया वहीं ऐसा न होने पर सख्त कार्यवाई की बात कही.

सीएम योगी ने कहा कि जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि निराश्रित गोवंश और आवारा पशुओं की समस्या से जिले की जनता और किसानों को राहत मिले. उन्होंने कांजी हाउस का नाम बदलकर गो-संरक्षण केन्द्र रखने के निर्देश दिए. गो-संरक्षण केन्द्रों में निराश्रित और आवारा पशुओं को रखा जाए, ताकि इस समस्या से निजात मिले. उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी 10 जनवरी, 2019 तक सभी निराश्रित और आवारा पशुओं को गो-संरक्षण केन्द्रों में पहुंचा दिया जाए.

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गो-संरक्षण केन्द्रों में पशुओं के चारे, पानी और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. जहां पर चहारदीवारी न मौजूद हो, वहां पर फेन्सिंग की व्यवस्था की जाए. साथ ही, केयरटेकर भी तैनात किए जाएं, जो इनकी देखरेख करें. उन्होंने कहा कि आवारा पशुओं के मालिकों का पता लगाकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. यदि कोई व्यक्ति गो संरक्षण केन्द्र से अपने पशु को छुड़ाने के लिए आए, तो उससे आर्थिक दण्ड वसूला जाए.

प्रत्येक जिले में 1000 निराश्रित पशुओं के लिए आश्रय स्थल

श्रीकांत शर्मा ने बताया कि हर जिले में कम से कम 1000 निराश्रित बेसहारा गोवंश पशुओं के लिए खोले जाने वाले आश्रय स्थल के निर्माण में सरकारी विभागों द्वारा सहयोग किया जाएगा. सरकार कांजी हाउस की परंपरा को पुनर्जीवित करेगी. नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में पिंजरापोल व कांजी हाउस खुलेंगे.

सांसद, विधायक तथा कई निधियों से होगा संचालन

सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि अस्थाई आश्रय स्थलों की स्थापना के लिए सांसद, विधायक ,मनेगा समेत कई निधियों से धनराशि व्यय होगी. वित्त पोषण ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत के अलावा नगर निकायों, वित्त आयोग, खनिज विकास निधि, राइफल नीति, सांसद क्षेत्र विकास निधि, विधायक निधि से होगा. मुख्यमंत्री ने स्थानीय निकायों को इस मद से 100 करोड़ रुपए दिए हैं.

स्टेट स्टेयरिंग कमिटी को मंजूरी

आश्रय स्थलों के संचालन के लिए प्रदेश स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्टेट स्टीयरिंग कमेटी बनेगी. इस कमेटी के निर्देशानुसार ब्लॉक स्तर पर बीडियो, तहसील स्तर पर एसडीएम, जिला स्तर पर डीएम, और मंडल स्तर पर कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित कमेटी कार्य करेगी.

कई सरकारी विभागों से लेंगे गोकल्याण सेस

निराश्रित गोवंश के आश्रय में सरकार को आर्थिक संकट ना हो इसके लिए प्रशासन के लिए सरकारी विभाग की आमदनी से अतिरिक्त सेस वसूलने का फैसला किया गया है. मंडी परिषद पहले 1% शुल्क देता था अब 2 प्रतिशत वसूल होगा. इससे सरकार को ₹340000000 की आय होगी. आबकारी विभाग से भी 2% अतिरिक्त सेस लिया जाएगा. राजकीय निर्माण निगम, सेतु निगम यूपीएसआईडीसी जैसी संस्थाओं को होने वाली आमदनी का 0.5% राज्य सरकार के अधीन युपीडा आदि संस्थाओं द्वारा वसूले जा रहे टोल टैक्स में 0.5% अतिरिक्त धनराशि गोकल्याण सेस के के रूप में वसूल होगी. आश्रय स्थल निर्माण में समस्त मिट्टी का कार्य मनरेगा से किया जायेगा.

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