हनुमागढ़ी के गद्दीनशीन महंत रमेशदास ब्रह्मलीन हुए

अयोध्या। श्री अयोध्या धाम स्थित सिद्धपीठ श्री हनुमानगढ़ी के सर्वोच्च पीठाधीश्वर परम पूज्य श्री श्री 1008 श्री महंथ रमेश दास जी महाराज गद्दीनशीन आज रविवार की शाम4:30 बजे ब्रह्मलीन ,साकेत वासी (स्वर्गवासी)हो गये।ये मूलरुप से शिवहर जिला के तरियानी थाना क्षेत्र के मोतनाजे ग्राम में स्वर्गीय गजेन्द्र जी के घर जन्म लिये थे।बाल काल में ही वो अयोध्या चले गये और वहीं वैराग्य ले महंत बने।महंत बनने के बाद हनुमान गढ़ी के विश्वभर में फैले मंदिरों का भ्रमण करने के बाद अयोध्या फिर वापस आये।उनके प्रेरणादायी भक्ति से प्रभावित हो अखाड़ा परिषद द्वारा उन्हें विश्वभर में फैले अनेकों पीठों के सर्वोच्च पीठ श्री अयोध्या हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महाराज बनाया गया और तब से वो सिर्फ अयोध्या के निवासी हो गए।उनके गद्दीनशीन बनने के बाद ही हनुमान गढ़ीे किला एवं हनुमान गढ़ी स्थिति गौशाला सहित बंगाल में स्थित गंगा सागर मंदिर की दोबारा से जीर्णोद्धार हुआ और फिर से हजारों वर्षों के लिये किला एवं मंदिर सुरक्षित किया गया।वो आजीवन निर्विवाद रहे।उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए आप को ज्ञात हो कि कल दिनांक 26 नबम्बर को दिन के 10 बजे श्रीहनुमानगढ़ी से साकेतवासी ब्रह्मलीन महाराज जी की अंतिम यात्रा हनुमागढ़ी के सभी महन्त व उनके शिष्य कल्याण दास जी महाराज के नेतृत्व निकाली जायेगी। उससे पहले आप सभी भक्त गण् महाराज जी की अंतिम दर्शन पा सकते हैं। महराज जी के शिष्य कल्याण दास जी ने उक्त जानकारी दी। महन्त के साकेतवास होने पर धीरज सिंह चौहान, चंदन यादव, श्री चंद यादव सहित हनुमागढ़ी के सभी सन्त महन्त शिष्यगण ने भी शोक जताये है।इसके अलावा मवई ब्लॉक प्रमुख राजीव तिवारी खुन्नू पांडेय आकाश मणि त्रिपाठी माधव आचारी अखिलेश तिवारी आदि लोगों ने भी गद्दीनसीन के साकेतवास होने पर गहरा शोक प्रकट किया है।

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