बुलंद हौंसले के साथ इबरार विकलांगता को दे रहा मात।…विश्व विकलांगता दिवस पर चौपाल की खास रिपोर्ट।

दोनों पैर से विकलांग दाड़ी बाल काटकर परिजनों की कर रहा परवरिश

विश्व विकलांग दिवस पर विशेष

[राकेश यादव एडमिन खबरों की चौपाल]

मवई(फैजाबाद)-:

============अगर मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो लाख जीवन में बाधा सामने आये, फिर भी वह कामयाबी की ओर अग्रसर होता है। इस समाज में अभी भी बहुत ऐसे लाचार व बेबश लोग हैं, जो अपनी लाचारी के बावजूद समाज के सामने यह प्रदर्शित करना चाहते हैं कि हौसला अगर बुलंद हो तो कामयाबी अवश्य मिलेगी ।कुछ इसी तरह की बातों को अपने मन में प्रेरणा लेकर मवई ब्लाक अंतर्गत कामापुर निवासी दोनों पैर से जन्म से ही विकलांग 28 वर्षीय मो इबरार अपनी जिंदगी की गाड़ी को न सिर्फ खींच रहा है, वरन वह अपने परिवार का भी परवरिश कर रहा है।इबरार का जब जन्म हुआ तो  उसने विकलांग बन कर ही इस धरती पर दस्तक दी । जन्म के बाद  उसकी विकलांगता को लेकर माता-पिता में निराशा हुई। काफी प्रयास किया गया कि उसकी विकलांगता दूर हो, लेकिन परिवार में आर्थिक तंगहाली ने मो इबरार की विकलांगता को दूर नहीं कर सकी । जब बड़ा हुआ तो वह पढ़ाई करना चाहता था, लेकिन पढ़ाई के लिए भी समुचित साधन और संसाधन नहीं मिलने को लेकर वह अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोड़ दिया। इसके बाद उसके परिवार के लोगों ने उसकी शादी करा दी। परिवार बढ़ने के बाद इबरार को उसके परवरिश की चिंता सताने लगी इधर इबरार कुछ सरकारी मदद के लिए भी हाथ बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन इसमें उसे बहुत हद तक सफलता हाथ नहीं लगी। बाद में उसने हार नहीं मानी और किसी तरह से उसे विकलांगों के लिए दी जानेवाले ट्राइसाइकिल मिली।इसके बाद उसके मन में कुछ करने की आश जाग उठी. इसी बीच इबरार ने एक नाइ की दुकान पर बाल कटिंग सीखने लगे और फिर एक सेट खरीद लिया और एक छप्पर रानेपुर नहर पुलिया पर रख कर दाढ़ी और बाल काटना शुरू कर दिया ।मो इबरार कहता है कि यह उसका अपना श्रम है. इसकी बदौलत वह अपने परिवार व बच्चों की परवरिश कर रहा है।वह बताता है कि अच्छी सर्विस देता है एवं समय की पाबंदी रखता है. इसका नतीजा यह होता है कि क्षेत्र में वह काफी प्रसिद्ध हो गया है. उस की तमन्ना है कि उसके बच्चे पढ़-लिख कर अच्छी मुकाम हासिल करें, ताकि आनेवाले समय में उसके इस कठिन मेहनत का फल मिल सके । इसके लिए वह अभी भी सरकारी मदद की ओर टकटकी भरी निगाहों से देख रहा है लेकिन कोई सरकारी इमदाद नही मिल सकी।

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