अयोध्या : वृद्ध की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार में बाधा बनी विधवा बहू

विधवा बहू को पैतृक जायदाद में हिस्सा न मिलने से हुई नाराज

ग्रामीणों के साथ विधवा बहू ने रोका अंतिम संस्कार

सीओ व तहसील प्रशासन के समझाने के बाद दोपहर बाद हुआ अंतिम संस्कार

मवई(अयोध्या) ! एक पिता ने दो बेटों में से एक की मौत हो जाने पर उसकी विधवा पत्नी को पैतृक जायदाद में हिस्सा देने से वंचित कर दिया।ये बात उसकी मौत के बाद उजागर हुई।तो विधवा महिला को उसका हक दिलाने के लिए पूरा गांव लामबंद हो गया।और न्याय का निर्णय होने तक वृद्ध की लाश के अंतिम संस्कार पर रोक लगा दी।इस बात की भनक लगते ही सीओ डा0 धर्मेन्द्र यादव सहित पूरा तहसील प्रशासन मौके पर पहुंचा।और विधवा महिला के साथ न्याय होने के आस्वासन पर दोपहर बाद वृद्ध का अंतिम संस्कार हुआ।मामला मवई थाना क्षेत्र के सेवढारा गांव का है।

जानकारी के मुताविक सेवढारा गांव निवासी राम बहादुर वर्मा के दो लड़के राम चन्दर व सुरेंद्र कुमार वर्मा थे।जिसमें सुरेंद्र कुमार की 8 वर्ष पहले मौत हो गई थी।लेकिन राम बहादुर अपने बेटे की मौत के बाद उसकी विधवा पत्नी पर कोई दरियादिली नही दिखाई।जबकि उसके बहू होने का पूरा फर्ज निभाया।राम बहादुर के पास करीब 12 बीघा पैतृक जमीन थी।लेकिन उसने पूरी जमीन अपने एक बेटे रामचंद्र की औरत उषा देवी के नाम एक वर्ष पूर्व ही वसीहत कर दिया।ये बात बुधवार की रात उसकी मौत के बाद उजागर हुई।तो मृतक की विधवा बहू ने गुरुवार को आरोप लगाया कि इलाज कराने के बहाने उसकी देवरानी ने वसीयत कर लिया।सुरेंद्र कुमार की औरत किरन कुमारी के दो लड़के सूरज सुभानकर है।जिन्हें जायदाद में हिस्सा न मिलने की जानकारी मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण उसके पक्ष में लामबंद होते हुए पुलिस प्रशासन को बुलाकर उसे न्याय दिलाने के लिए अड़ गए।ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उषा देवी वरासत की जमीन आधा हिस्सा नही देंगी तब तक अंतिम संस्कार नही किया जायेगा।मौके पर तसील की टीम के साथ पहुंचे सीओ डा0 धर्मेन्द्र यादव के आस्वासन के बाद मृतक के शव का अंतिम संस्कार हुआ।कहना गलत न होगा कि ऐसे ही पिता होते है जो मरने के बाद अपने घर में गृह युद्ध का बीज बोकर जाते है।

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