बाराबंकी : कुबैत से लौटे मनीराम देश मे चाह रहे रोजगार

रामसनेहीघाट(बाराबंकी) ! संकटकाल के इसदौर में रोजगार का संकट इसकदर है कि दो वक्त की रोटी के लिए विदेशी कामगार अपनी खेती किसानी पर वापस लौट चुका है। कुबैत के हसाबी शहर से अपने वतन लौटे मनीराम तिवारी इस वक्त खेती में जुटे है। तहसील रामसनेहीघाट के ग्राम पूरे पण्डित महुलारा निवासी मनीराम कुवैत के हसाबी में एसी टैक्निसियन का काम कर रहे थे। 31जनवरी को कुबैत से लौटे मनीराम महामारी संकटकाल के चलते दुबारा कुबैत न जा सके। इनका बीजा 30 अप्रैल तक ही था। लेकिन इंटरनेशनल उड़ान न चलने से ये दुबारा कुबैत नही जा सके। इस दौरान इन्होंने अपना किसानी का कार्य शुरू किया। 2014 में घर की माली हालत ठीक न होने की वजह से वो अपना देश छोड़ विदेश की यात्रा पर निकले थे। कम उम्र में ही माँ बाप का साया उठ जाने की वजह से आर्थिक तंगी से जुझ रहे मनीराम अपने परिवार से दूर सात समुंदर पार की यात्रा पर 6 वर्ष पूर्व निकल पड़े तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए उन्होंने कुबैत में अपना कार्य शुरू किया। विदेश में नौकरी कर उन्होंने अपने पारिवारिक स्थिति को न केवल सम्भाला बल्कि परिवार के लिए सहारा बने। कई वर्ष बिताने के बाद मनीराम छुट्टी पर जनवरी में हमवतन लौटे लेकिन उन्हें क्या पता था वो दुबारा अपने कार्य पर वापस नही जा सकेंगे। खेती युक्त कम भूमि की वजह से नौकरी करने का फैसला लेने वाले इस विदेशी कामगार ने पुनः अपनी खेती को ही अपना पेशा समझ पूरी मेहनत व तन्मयता से जुटे है। इस दौरान मनीराम कहते है कि सरकार दुबारा अंतरराष्ट्रीय उड़ान चलाएगी तो पुनः वो कुबैत जाएंगे। हलाकि संकटकाल के इस दौर में उन्हें अपने वतन में रहने की खुशी भी है लेकिन काम छूट जाने का दोहरा दुख भी है। मनीराम सरकार से अपील करते है कि अगर उनके हुनर के हिसाब से स्वदेश में ही उन्हें काम मिल जाता है तो वो अपने देश मे ही सेवा को तैयार है। मनीराम आगे कहते है कि परिवार चलाने के लिए रोजगार जरूरी है परिवार में एकलौते है जो रोजगार से जुड़े हुए थे अब बेरोजगारी की वजह से परिवारिक संकट खड़ा है।

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