भंडारा आयोजित कर हाजी अलीम ने पेश की एकता की मिशाल।

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हज से लौटने के बाद मंगलवार को गांव में किया भव्य भंडारा।मवई ब्लॉक के अशरफपुर गंगरेला के निवासी है हाजी अलीम।मवई(अयोध्या)! आज के दौर में गांव में आयोजित कुछ कार्यक्रम बेहद सुकून देते हैं।नफरत की आग को मिटाने के लिए बारिश बनकर बरसता एक कार्यक्रम मंगलवार को मवई ब्लॉक के अशरफपुर गंगरेला में देखने को मिला।यहां मुस्लिम संप्रदाय का एक व्यक्ति हज यात्रा से लौटने के करीब दो माह बाद गांव में एक भव्य भंडारा का आयोजन किया।और भंडारे में आस पास गांवो के करीब तीन हजार लोगों को आमंत्रित भी किया।मंगलवार की दोपहर से शुरू इस भंडारे में लोगों ने बड़े हर्षोल्लास के साथ कार्यक्रम में शामिल होकर भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते रहे।लोगों के भीड़ के बीच राम राम,जय राम के साथ आदाब व सलाम की आवाजें भी सुनाई देती रही।भंडारे के पंगत में टोपी व टीके ने एक साथ भोजन कर आपसी एकता की मिसाल एक पेश की।इससे पूर्व भी हाजी अलीम ने एक भंडारा आयोजित किया था।भंडारे में पहुंचे सामाजिक कार्यकर्त्ता जगन्नाथ यादव ने बताया हमारा गांव हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक है।इन्होंने बताया भंडारे में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की ये तस्वीर हिंदू-मुस्लिम एकता,भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा दे रहा है।इसीलिए हम लोगों ने आज के इस भंडारे का नाम ‘लंगर-ए-आम’ दिया है।हाजी अलीम बताते है कि ये पति पत्नी के परिवार में भाई अब्दुल कय्यूम अतीक ख़ाँ व भतीजे अनवर आदिल हफीक लतीफ आदि है।इनकी अपनी कोई औलाद नही है।इन्होंने बताया देश मे आज की स्थित देख वेहद दुख होता है।इसीलिए हमने ये भंडारा करना उचित समझा कि मेरे गांव के मन चैन व भाईचारे को किसी की नजर न लगे।और हिंदू-मुस्लिम एक दूसरे के करीब बने रहे।दोनों एक-दूसरे को इतने करीब से जानें कि सिर्फ इंसानियत व भाईचारा ही दिखे।भंडारे में आये पूर्व प्रधान कृष्ण रावत नंदलाल यादव रामसजीवन अरविंद यादव दृगपाल राधेश्याम धनीराम कमलेश सुरेश व जेपी ने बताया वास्तव मे मेरे गाँव मे ये दूसरा भंडारा है जो अमन और मोहब्बत का पैगाम दे रहा था।और इंसानियत की दावत दे रहा था।

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