मेरठ ! नागरिकता कानून के विरोध में पिछले दिनों राज्य में हुई हिंसक घटनाओं पर उत्तर प्रदेश पुलिस अब डॉक्यूमेंट्री फिल्म बना रही है। यह हिंसा कैसे शुरू हुई और पुलिस ने इसे कैसे कंट्रोल किया, इसे फोटो-वीडियो के जरिये दिखाया जाएगा।मेरठ और मुजफ्फरनगर पुलिस ने रविवार को डॉक्यूमेंट्री फिल्में जारी कर दीं। अन्य जिलों में भी इन डाक्यूमेंट्री पर तेजी से काम चल रहा है। यह वीडियो सभी राज्यों की पुलिस को भेजी जाएंगी, ताकि दंगा नियंत्रण में ये फिल्में मददगार हो सकें।पिछले दिनों कर्नाटक राज्य के मैंगलुरु शहर में एक हिंसा हुई थी। हिंसा के बाद मैंगलुरु पुलिस ने डॉक्यूमेंट्री जारी की। इसे सोशल मीडिया पर काफी सराहा गया। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश पुलिस हिंसा प्रभावित जनपदों में डॉक्यूमेंट्री फिल्में तैयार करा रही है। फिल्म बनाने का मकसद यह बताना है कि कठिन परिस्थतियों में भी उप्र पुलिस ने हिंसा को कैसे कंट्रोल किया।पिछले दिनों नागरिकता कानून को लेकर हुई हिंसा में उत्तर प्रदेश के 20 से ज्यादा जिले प्रभावित हुए थे। प्रदेश में सबसे ज्यादा छह मौतें मेरठ में हुई थीं। मेरठ पुलिस ने रविवार को 9.24 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री जारी कर दी। इस फिल्म का शीर्षक ‘सीएए के खिलाफ मेरठ युद्धग्रस्त देश जैसा’ रखा गया है। यह शांतिपूर्वक प्रदर्शन था या जानलेवा दंगे थे, इसकी सच्चाई बताई गई है। फिल्म की शुरुआत जामा मस्जिद से है, जहां जुमे की नमाज से पहले काली पट्टियां बांटी गईं। इसके बाद हिंसक प्रदर्शन हुआ और पुलिस पर पथराव कर दिया गया। मेरठ पुलिस ने आंकड़ा दिया है कि हिंसा के बाद नगर निगम ने 44 ट्रॉली पत्थर उठवाए। इसके बाद भीड़ की तरफ से फायरिंग करते हुए कुछ वीडियो दिखाए गए हैं। कुछ पत्रकारों, पुलिसकर्मियों की जुबानी बताई है, जिसमें दंगाइयों ने कैसे उन्हें बंधक बनाकर जलाने का प्रयास किया था।हिंसा प्रभावित सभी जनपदों में डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनवाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य बताना है कि पुलिस ने किन परिस्थतियों में हिंसा पर काबू पाया। या इस तरह की हिंसा से समाज को क्या मिलता है। प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन

मेरठ : पांच दंगे और 91 मौत 12 महीना सात दिन

कर्फ्यू डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, भूमिया पुल को मेरठ का सबसे खतरनाक स्थान बताया गया है। यहां 1982 के दंगे में 30 मौतें हुईं और तीन महीने तक कफ्र्यू रहा। 1987 के दंगे में 55 मौतें हुई और 9 महीने तक कफ्र्यू रहा। 1999 में 4 दिन और 2009 में 3 दिन तक कफ्र्यू लगा रहा। 20 दिसंबर को मेरठ में हुए दंगे का निष्कर्ष पुलिस ने 6 सिविलियन की मौत, 50 पुलिसवालों के घायल और 48 लाख की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने के रूप में बताया है। डॉक्यूमेंट्री के सबसे अंत में मेरठ पुलिस ने पूछा है कि इन राइट्स का क्या फायदा निकला? तय करना होगा कि हम भारतीय हैं।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने पूछा क्या हमने आजादी के मायने बदले

डॉक्यूमेंट्री फिल्म की शुरुआत सड़कों पर उतरे लोगों के जुलूस से दिखाई गई है। इसके बाद डीएम-एसएसपी उन्हें समझाते हैं। इसके बावजूद भीड़ नहीं मानी और हिंसा पर उतर आई। एक अन्य स्थान की वीडियो में भीड़ पत्थरबाजी कर रही है। इसी दौरान पुलिस ने पूछा है कि क्या हमने आजादी के मायने बदल दिए हैं.? लोकतंत्र शांतिपूर्वक आंदोलन की इजाजत देता है, लेकिन हिंसा? डॉक्यूमेंट्री में महात्मा गांधी का भी चित्र है, जिसमें उनके साथ लोगों को शांतिपूर्वक आंदोलन करते दिखाया गया है।

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