अयोध्या: कवि “दिव्य” को महबोधि सोसायटी ने किया सम्मानित

अवधी में लिखा है अठारह सर्ग का श्री गौतमबुद्ध चरित,सांची स्तूप में श्रीलंका व जापान के अध्यक्ष ने दिया सम्मान पत्र।

अमानीगंज(अयोध्या) ! ओज के प्रख्यात कवि व राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार खुशीराम द्विवेदी दिव्य को महबोधि सोसायटी श्रीलंका व जापान ने सम्मानित किया है।मध्य प्रदेश के सांची स्तूप में आयोजित विशेष समारोह में सोसायटी के अध्यक्ष वेनेगल उपतिस्स नायके थेरो ने सम्मान पत्र प्रदान किया।कवि “दिव्य” ने राम चरित मानस की तर्ज पर अवधी में श्री गौतम बुद्ध चरित की रचना की है। दोहा,चौपाई व सोरठा छंद में रचित महाकाव्य में अट्ठारह सर्ग हैं। गौतम बुद्ध के सम्पूर्ण जीवन वृत्त को अपनी रचना का विषय बनाने वाले “दिव्य” ने इसके पूर्व ओज से ओतप्रोत काव्य संग्रह “उदघोष” की रचना की है।सांची स्तूप के प्रबन्धक शकील सिद्दीकी ने इस सम्मान के लिए विशेष आमंत्रण भेजा था।वियतनाम,श्रीलंका,जापान व अपने देश के लाखों बौद्ध भिक्षुओं की उपस्थिति में प्राप्त होने वाले इस सम्मान पर क्षेत्र के साहित्यकारों-बुद्धिजीवियों व शिक्षकों ने प्रसन्नता जताई है। खुशीराम द्विवेदी दिव्य मूल रूप से अमानीगंज विकासखंड के बांसगांव के निवासी हैं। साहित्य के क्षेत्र में श्री दिव्य को इसके पूर्व भी कई सम्मानो से नवाजा जा चुका है। श्री दिव्य की पुत्री मानसी द्विवेदी भी साहित्य के क्षेत्र में कई पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है।

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