बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के जिले में 400 फर्जी शिक्षक

गोरखपुर: बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने पिछले दिनों गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में यह कह कर विवाद खड़ा कर दिया कि प्राथमिक स्कूलों में तैनात 25 फीसदी शिक्षक जानते ही नहीं कि उनका विद्यालय कहां हैं। हकीकत यही है कि गोरखपुर और बस्ती मंडल में फर्जी शिक्षकों की लंबी फौज है। खुद बेसिक शिक्षा मंत्री के जिले सिद्धार्थनगर में एसटीएफ की नजर में 400 फर्जी शिक्षक हैं।

गोरखपुर-बस्ती मंडल में अभी बमुश्किल 150 फर्जी शिक्षक बर्खास्त हुए हैं जबकि इनकी संख्या 2000 से अधिक बताई जा रही है। देवरिया में 20 साल से नौकरी कर रहे अरुण मिश्र को बर्खास्त किया गया है तो देवरिया में अश्वनी श्रीवास्तव और मुक्तिनाथ नाम के शिक्षक बर्खास्त हुए हैं।

फर्जी शिक्षकों की तैनाती को लेकर गोरखपुर के एएसपी और सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे जांच कर रहे हैं। फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति मामले में एसटीएफ ने सिद्धार्थनगर में बीएसए के स्टेनो हरेंद्र कुमार सिंह, प्राथमिक विद्यालय भटिहां उस्का बाजार के प्रधानाध्यापक सच्चिदानंद पाण्डेय, महिला शिक्षक प्रभा मिश्रा के पति अवधेश मिश्र, स्टेनो के एजेंट बाबूलाल चौधरी और चालक चंद्रदेव पांडेय को गिरफ्तार किया है। इनके पास बैग में ढाई लाख रुपए बरामद हुए थे।

गिरफ्तार स्टेनो हरेन्द्र कुमार सिंह ने एसटीएफ के सामने कबूला है कि सिद्धार्थनगर जिले में करीब 400 फर्जी शिक्षक हैं। उसने बताया कि सच्चिदानंद की टीईटी की मार्कशीट फर्जी है जबकि अवधेश की पत्नी के दस्तावेज भी जाली हैं। एसटीएफ की पूछताछ में स्टेनो ने बताया कि सिद्धार्थनगर में पिछले दिनों बर्खास्त हुए 29 शिक्षकों को बचाने के लिए दलाल पैसा लेते थे। बर्खास्त शिक्षक को बचाने के लिए राकेश सिंह नाम के शख्स ने उसे 5 लाख रुपए और बीएसए सिद्धार्थनगर राम सिंह को 10 लाख रुपए दिए थे। एसटीएफ के मुताबिक, रिश्वत के बदले ये लोग विभाग से लेकर यूनिवर्सिटी तक वेरिफिकेशन के नाम पर मामले को लंबित करते और फिर दस्तावेज सही कराकर उनकी तैनाती हो जाती। एसटीएफ ने एफआईआर में बीएसए का जिक्र कर दिया है और अब सरकार से बीएसए के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगेगी।

एसटीएफ की जांच में पता चला है कि प्रतापगढ़ के रहने वाले हिमांशु सिंह, देवरिया के राकेश सिंह व रमेश शुक्ल भी फर्जीवाड़े के अहम किरदार हैं। जेल भेजे गए स्टेनो ने बर्खास्त 29 शिक्षकों की भर्ती और बहाल कराने की प्रक्रिया में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होने की जानकारी दी थी। बर्खास्तगी के मामले में सिद्धार्थनगर जिला फिलहाल सबसे आगे दिख रहा है। जहां बीएसए अब तक 90 शिक्षकों को बर्खास्त कर चुके हैं। एएसपी रोहन प्रमोद बोत्रे का कहना है कि प्रकरण में गहराई तक जांच की जा रही है। सभी सदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। फर्जीवाड़े की जड़े काफी गहरी हैं।

बचने के लिए इस्तीफा दे रहे फर्जी शिक्षक

गोरखपुर में फर्जी शिक्षकों की संख्या 600 के आसपास बताई जा रही है। अभी तक 32 शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं। कूटरचित दस्तावेजों के सहारे फर्जी नियुक्ति हासिल करने वाले शिक्षक अब कार्रवाई से बचने के लिए इस्तीफे का सहारा ले रहे हैं। गोरखपुर के बड़हलगंज ब्लॉक के विद्यालय में तैनात नीरज पांडेय, खजनी ब्लॉक की प्राची मिश्रा और पिपराइच ब्लॉक में तैनात सुरेश सिंह ने डाक के जरिए अपना इस्तीफा बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजा है। तीनों ही शिक्षकों के नाम बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से एसटीएफ को सौंपी गई 115 संदिग्ध शिक्षकों की सूची में शामिल हैं। बार-बार सत्यापन के लिए बुलाए जाने के बाद भी ये शिक्षक अपने प्रमाणपत्रों की जांच कराने विभाग नहीं आ रहे थे। आरोपी शिक्षकों के खिलाफ दूसरे के प्रमाणपत्रों की आधार पर नौकरी हासिल करने की शिकायत की गई थी। गोरखपुर के बीएसए बीएन सिंह का कहना है कि गोरखपुर में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अब तक 32 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। वहीं 100 से अधिक फर्जी शिक्षक एसटीएफ के रडार पर हैं।

इन सभी शिक्षकों को सत्यापन के लिए विभाग की ओर से बुलाया जा रहा है। तीन बार की नोटिस के बाद भी अगर ये सत्यापन को प्रस्तुत नहीं होंगे तो इन्हें बर्खास्त किया जाएगा। जो डाक से इस्तीफा भेज रहे हैं उनके खिलाफ जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। सत्यापन से भागने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसा जाएगा।

फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का लंबा इंतजार

एसआईटी प्रदेश में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति की जांच कर रही है। प्रदेश के 57 जिलों में 1321 फर्जी शिक्षक चिह्नित किए गए हैं। बचे हुए 18 जिलों में भी बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षक हैं। अभी तक करीब 150 फर्जी शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा चुकी है। अन्य को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। इनमें से कई शिक्षकों ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के फर्जी और टैम्पर्ड प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। लेकिन भले ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई हो लेकिन किसी भ्रष्टाचारी बाबू व बीएसए न तो कार्रवाई हुई है और न वेतन की रिकवरी हुई है।

बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चन्द्र द्विवेदी का दावा है कि सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा। विभाग में एक भी फर्जी शिक्षक नौकरी नहीं कर सके इसके लिए तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा। मंत्री का दावा है कि प्रदेश में 4055 संदिग्ध शिक्षकों में से एसटीएफ द्वारा 1350 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित किया गया है। इनको बर्खास्त करने और उन पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गोरखपुर में पकड़े गए 20 फर्जी शिक्षकों पर मुकदमा क्यों नहीं हुआ, इसका जवाब बीएसए से मांगा जायेगा। 5 प्रतिशत गलत लोगों की वजह से पूरा विभाग बदनाम बना हुआ है।

महराजगंज में बलिया के रहने वाले सतीश सिंह ने 16 साल तक बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी की। वेतन के नाम पर 50 लाख रुपए से ज्यादा उठाए ऊपर से भवन निर्माण में करोड़ों रुपए कमाए। सतीश सिंह को 2012 में बर्खास्त किया गया लेकिन अभी तक एक रुपए की भी रिकवरी नहीं की जा सकी है। इतना ही नहीं फर्जी शिक्षक मामले में मुकदमा दर्ज करने में भी लापरवाही बरती जा रही है।

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