रुदौली :अकीदत से मनाया गया शबे बारात,रात भर गुलजार रहीं मस्जिदें व इबादतगाह

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रुदौली(अयोध्या) ! रूदौली क्षेत्र में शबे बारात का पर्व पूरी अकीदत व अहतराम के साथ मनाया गया।इस मौके पर रूदौली नगर सहित समूचे ग्रामीण क्षेत्रो की मस्जिदों में लोगों ने पूरी रात इबादत व तिलावत ऐ कुरान पाक की।रूदौली नगर सहित ग्रामीण इलाके के कब्रिस्तानों में अपने अज़ीज़ों की कब्र पर लोगों ने अगरबत्ती जलाकर फातिहा भी पढ़ा।14 शाबान जिसको शबे बारात या नीमे शाबान भी कहा जाता है।इस रात को बुराईयों से दूर होने वाली रात भी कहते हैं।कहा जाता है कि शबे बारात की पूरी रात जागकर इबादत करने से सारे गुनाह माफ हो जाते हैं।शबे बारात के मौके पर मस्जिदों,इबादतगाहों,अजाखानों व आस्तानो में रात भर विशेष नमाज,दुआएं व आमाल किये जाते हैं।कुछ लोगों द्वारा मस्जिदों व घरों की विशेष तौर से सजावट की जाती है।लोग हलवा का विशेष पकवान अपने घरों में बड़ी पाकीजगी से बनाते हैं व नज्र दिलाते हैं।शबे बारात के मौके पर रूदौली नगर की सुनहरी मस्जिद,मासुमन मस्जिद,साबरी मस्जिद,मस्जिद चाँद तारा,पुरेखान की बड़ी मस्जिद,मस्जिद शेख उल आलम समेत सभी मस्जिदों में रातभर हजारों की संख्या में लोग इबादत में मसरूफ रहे।

शिया मुलसमानों के अंतिम इमाम के जन्मदिन पर हुई महफ़िल

शबे बारात शिया मुसलमानों के अंतिम इमाम हजरत इमाम मेहदी की वेलादत की शब भी है।शिया मुसलमानों के आखिरी इमाम इमामे अस्र के जन्मदिन 15 शाबान की खुशी में शनिवार को रूदौली कस्बे के विभिन्न स्थानों पर महफिल-मीलाद का आयोजन किया गया। शहर के इमामबाड़ों,रौजों,कर्बला और मस्जिदों में खूबसूरत रोशनी की गई एवं शबे बारात के पर्व पर विशेष आमाल एवं दुआओ के लिए नमाज अदा की गयी।शिया मुलालमनो के अंतिम इमाम के जन्मदिन पर शिया दरियावाली मस्जिद मोहल्ला सूफ़ियाना पूर्वी में एक महफ़िल ऐ मीलाद का आयोजन किया गया। महफ़िल की शुरुआत तिलावते कलामे पाक से की गई।इमाम मेहदी के जन्म दिवस पर आयोजित महफिल को खिताब करते हुए चौधरी अहमद अली बुरेर ने शबे-बरात की फजीलत बयान की और इमाम के जन्म और गैबत पर विस्तार से रोशनी डाली बाद महफ़िल के मुक़ामी शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश किये।जिसको को सुनकर उपस्थित लोग वाह-वाह कर उठे।

अरीज़ा दरिया में डाल कर जीवित इमाम से मांगी दुआए

शिया मुसलमानों की मान्यता के अनुसार शबेबरात की रात्रि के बाद आने वाली सुबह यानी 15 शाबान को पैगम्बर हज़रत मोहम्मद के बारवे उत्तराधिकारी इमाम मेहदी का जन्मदिन मनाया जाता है शिया मुसलमानों का यह अक़ीदा है कि आज भी इमाम मेहदी जीवित है और हुक्मे खुदा से हम सब की नज़रों से गायब है इसी मान्यता के अनुसार शिया समुदाय के लोग नमाज़े 15 वीं शाबान को फज्र की नमाज़ के बाद दरिया(नदी नहेर)पर जा कर अपनी मन्नतो का अरीज़ा(ख़त,चिट्टी)लिख कर उसे आटे की लोई में बंद करके दरिया/नदी/ नहेर /तालाब में श्रद्धा के साथ समर्पित किया जाता है।अरीज़ा(चिट्टी) लिखी जाने के पीछे ये भावना रहती है की हज़रत इमाम मेहदी हमारे अरीज़े को पढ़ कर हमारी मन्नतो को पूरा करेंगे।महफ़िल में प्रमुख रूप से इमामे जुमा मौलाना सरफ़राज़ हुसैन,सभासद डॉ0 अमीर अब्बास,मोहम्मद मोहसिन,शादाब काज़मी, शबीउल हसन,ज़ियाउल हसन,सिराजुल हसन,अज़हर हसनैन,वजीह हसनैन,सैय्यद कुमैल अशरफ, अली जाफर,कमर अब्बास कैफ़ी,अज़ीम रूदौलवी,यूसुफ तकवी सीबारी,मीसम रिज़वी अहरौलवी,सैयद फ़ज़ील अशर,हसन जफर समेत काफी तादात में लोग उपस्थित रहे।

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