अयोध्या: अवध की होली में बही सौहार्द की गंगा ,टीके और टोपी में गले मिल दी एक दूसरे की बधाई


होली के दिन दिल मिल जाते हैं,रंगो में रंग घुल जाते हैं। शोले फिल्म का यह गाना अयोध्या के गंगा-जमुनी तहजीब पर खरा उतरता है। भले ही हिंदू-मुस्लिम पक्ष अपने-अपने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के लिए अदालत में लड़ाई लड़ रहे हो,लेकिन अयोध्या की धरती पर आज गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल देखी गई। मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी,हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास,रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास एक दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिले और फूलों की होली खेली। यह दृश्य किसी फिल्म का नहीं था,बल्कि अयोध्या की गौरव कथा है,जो गंगा जमुनी-तहजीब की मिसाल और साथ ही देश के लिए एक बड़ा और सकारात्मक सन्देश भी बन जाता है। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के आवास पर हिंदू और मुस्लिमों का आज जमावड़ा हुआ।दोनों समुदायों के लोगों ने जमकर एक दूसरों के गुलाल लगाएं और फूलों की होली खेली।होली की पूर्व संध्या पर यह अद्भुत नजारा था,जहां पर हिंदू मुस्लिम दोनों मिलकर फाग की धुन पर थिरक उठे, वहीं शहर के जाने-माने कई कवियों-कवियत्रीयो ने अयोध्या की संस्कृति को अपनी कविताओं के माध्यम से सौहार्द से ओत-प्रोत भावनाओं को लोगों तक पहुंचाया। जब राम मंदिर-बाबरी मस्जिद की सलाह की पहल पर लोगों की नजर हो, उस समय दोनों पक्षकार जब होली खेलते हैं,तो नजारा अद्भुत हो ही जाता है,साथ ही देश के लिए एक बड़ा और सकारात्मक सन्देश भी बन जाता है।आचार्य सत्येंद्र दास के आवास पर लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की कामना भी की वही मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने लोगों को होली की शुभकामनाएं भी दी।

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