विजय माल्या को भारत लाने की उम्मीद बढ़ी, UK होम सेक्रटरी ने प्रत्यर्पण आदेश पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली
बैंकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने की उम्मीद बढ़ गई है। UK सरकार की तरफ से माल्या को तगड़ा झटका लगा है। UK होम सेक्रटरी साजिद जाविद ने सोमवार को माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। इसे भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। होम ऑफिस की ओर से बताया गया है कि विजय माल्या औपचारिक रूप से अभी अपील कर सकते हैं। अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करने के लिए माल्या के पास 14 दिनों का समय है।
भारत ने फैसले का किया स्वागत
इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने यूके सरकार के फैसले का स्वागत किया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘हमें माल्या के भारत प्रत्यर्पण के आदेश पर यूके होम सेक्रटरी द्वारा हस्ताक्षर करने की जानकारी मिली है। हम यूके सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। इसके साथ ही हम उसके प्रत्यर्पण के लिए कानूनी प्रक्रिया के जल्द पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।’

दिसंबर में कोर्ट में लगा था झटका
आपको बता दें कि किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख रहे माल्या पर 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। इससे पहले दिसंबर में माल्या (63) ब्रिटेन की एक अदालत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी केस हार गए थे। तब कोर्ट ने उन्हें भारत के हवाले करने की अनुमति दे दी थी। ब्रिटेन की अदालत ने कहा था कि वह भारत सरकार की ओर से दिए गए विभिन्न आश्वासनों से संतुष्ट है, जिसमें जेल की एक सेल का विडियो भी शामिल था।
मैजिस्ट्रेट का फैसला होम सेक्रटरी के पास गया था
दरअसल, प्रत्यर्पण संधि की प्रक्रियाओं के तहत चीफ मैजिस्ट्रेट का फैसला होम सेक्रटरी के पास भेजा गया था क्योंकि माल्या के प्रत्यर्पण आदेश को जारी करने का अधिकार उनके पास ही है। ब्रिटेन में रह रहे शराब कारोबारी पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से जमानत पर हैं। ऐसा लगता है कि माल्या को अपने खिलाफ ऐक्शन का कुछ दिन पहले ही आभास हो गया था। शायद इसी वजह से माल्या के सुर बदले थे।

हाल में माल्या ने अपनी दलील में ट्वीट कर दावा किया था कि उनकी कंपनी की 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। माल्या ने यह भी कहा था कि उन्हें कर्ज देने वाले बैंक ने इंग्लैंड में अपने वकीलों को उनके खिलाफ छोटे-मोटे मामले दर्ज करने की खुली छूट दी हुई है।

माल्या का अपना तर्क
माल्या अपने खिलाफ मामले को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं। माल्या ने कहा था, ‘मैंने एक भी पैसे का कर्ज नहीं लिया। कर्ज किंगफिशर एयरलाइंस ने लिया। कारोबारी विफलता की वजह से यह पैसा डूबा है। गारंटी देने का मतलब यह नहीं है कि मुझे धोखेबाज बताया जाए।’

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