अयोध्या : “या अल्लाह” मेरे महबूब की जिंदगी भी नही रही महफूज-पचलो हत्याकांड

मृतक महबूब आलम की फाइल फोटो

पटरंगा(अयोध्या) ! महबूब-जैसा नाम वैसा काम।अपने कार्य व्यवहार से लोगों के दिल में पल भर में जगह बना लेने वाला युवक कोई और नही पचलो गांव का रहने वाला 22 वर्षीय युवक महबूब आलम था।जो कब बेरहम इंसानों के आंखों में खटक गया किसी को पता ही नही चला।और अपने ही गांव में घूमते घूमते अचानक लापता हुआ।परिजन देर रात तक उसके आने का इंतजार करते रहे।लेकिन नही आया।अपने महबूब भाई के आने की आस में टकटकी लगाए बैठे मजबूर भाई मकसूद आलम को जब महबूब के लाश मिलने की सूचना मिली।तो उसके मुख से निकला या अल्लाह…महबूब भी नही रहा महफूज।न किसी दुश्मनी न किसी से यारी।अपना काम व मेरी सेवा के सिवा उसका दूसरा कोई काम नही था।ये कहकर वो फुट फूटकर रो पड़ा।
बता दे पचलो गांव का रहने वाला महबूब आलम मोहम्मद हुसैन का बेटा व पूर्व प्रधान नूरूल हसन का पोता है।ये पूरे परिवार का मुख्य व्यवसाय खेती है।गांव वालों की माने तो महबूब एक सीधा साधा होनहार लड़का था।जो अभी आठ माह पूर्व एक हादसे में असहाय हुए अपने बड़े भाई महबूब आलम की देख रेख हेतु गांव आया और यही रुक गया।महबूब की मौत के बाद खाट पर पड़े अशहाय भाई महबूब ने जमीन से मिट्टी उठाकर परिजनों को दी और फफक कर बोला मेरी ओर से भी भाई को मिट्टी दे देना।पचलो गांव में महबूब कब बेरहम इंसानों की आंख का कांटा बन गया किसी को पता ही नही चला।गांव वालों ने कहा कि इस गांव में महबूब जैसे होनहार लड़के की जिंदगी भी महफूज नही रह पाई।

रहने को सदा दहर में आता नही कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नही कोई

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