पुरुषोत्तम मास का शुभारंभ आज से , सनातन आस्था, साधना और आत्मशुद्धि का पावन पर्व
धर्मनगरी अयोध्या में शुरू हुआ पुण्य और साधना का विशेष काल

अयोध्या सहित पूरे देश में आज से पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का शुभारंभ हो गया। वैदिक ज्योतिष और सनातन धर्म में इस मास को अत्यंत पवित्र एवं पुण्यदायी माना गया है। यह माह भगवान विष्णु को समर्पित होता है और धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है।अयोध्या के प्रमुख मंदिरों, आश्रमों और सरयू घाटों पर सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। साधु-संतों ने इसे आत्मशुद्धि, सेवा और प्रभु भक्ति का श्रेष्ठ अवसर बताया है।
क्यों आता है पुरुषोत्तम मास
हिंदू पंचांग चंद्र गणना पर आधारित है, जबकि सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर रह जाता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग 32 महीने 16 दिन बाद एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है। यही अधिक मास आगे चलकर “पुरुषोत्तम मास” कहलाया।पुराणों के अनुसार पहले इस मास को “मलमास” कहा जाता था और इसे शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता था। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” प्रदान कर सर्वोच्च सम्मान दिया। तभी से यह मास भगवान विष्णु की विशेष आराधना का काल माना जाने लगा।
क्या है पुरुषोत्तम मास का महत्व
धर्मग्रंथों में पुरुषोत्तम मास को मोक्षदायी, पाप-नाशक और पुण्यवर्धक बताया गया है।मान्यता है कि इस माह में किया गया दान अक्षय फल देता है।श्रीमद्भागवत, गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्रनाम पाठ विशेष फलदायी होता है।सरयू स्नान और दीपदान से मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।संयमित जीवन और सत्कर्मों से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।इस माह में प्रभु विष्णु की आराधना करें।प्रतिदिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।गरीबों को अन्न, वस्त्र, जल, फल और गौसेवा का विशेष महत्व बताया गया है।रामचरितमानस, सुंदरकांड, विष्णु पुराण और भगवद्गीता का पाठ लाभकारी माना गया है।सादा भोजन, संयमित दिनचर्या और सदाचार इस मास की मूल भावना मानी जाती है।मांस, मदिरा और नशे से दूर रहें।क्रोध, अपशब्द, झूठ और विवाद से बचें।तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूरी रखें।विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः इस मास में नहीं किए जाते।
पुरुषोत्तम मास के लाभ
मानसिक और आध्यात्मिक शांति।परिवार में सुख समृद्धि और सकारात्मक वातावरण।पापों से मुक्ति और पुण्य की वृद्धि।संयम और साधना से आत्मबल में वृद्धि।भगवान विष्णु की कृपा से जीवन की बाधाओं में कमी।
क्या होती है हानि
धर्माचार्यों के अनुसार यदि व्यक्ति इस पवित्र माह में अधर्म, अपमान, नशा, क्रोध और असंयमित जीवन अपनाता है तो पुण्य क्षीण होता है और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त नहीं हो पाता। इसलिए इस मास में आचरण की शुद्धता को विशेष महत्व दिया गया है।
अयोध्या में विशेष धार्मिक आयोजन
राम की पैड़ी, हनुमानगढ़ी तथा श्री राम जन्मभूमि मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में कथा, भजन-कीर्तन, संकीर्तन और विशेष पूजन कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई है। सरयू तट पर श्रद्धालु स्नान कर दीपदान और दान-पुण्य करते नजर आए।आचार्य अर्जुन तिवारी बताते है कि पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन, सेवा, संयम और प्रभु भक्ति का दुर्लभ अवसर है।धर्मनगरी अयोध्या में इसकी शुरुआत के साथ पूरे वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार दिखाई दे रहा है। श्रद्धालु पूरे माह भगवान विष्णु की आराधना कर सुख, शांति और कल्याण की कामना करेंगे।

