पीएम संबोधन पर त्वरित टिप्पणी, सप्तपदी से पीएम ने मांगा सबका साथ सबका विश्वास

प्रहलाद तिवारी की रिपोर्ट

Kkc न्यूज ! यूं तो हर कोई जानता था कि मंगलवार को पीएम जब देश को संबोधित करेंगे तो लॉक डाउन की अवधि जरुर बढेगी। लेकिन जिस संयम के साथ पीएम ने अपने चिरपरिचित अंदाज में लॉक डाउन की अवधि बढ़ाने की न केवल घोषणा की बल्कि सप्तपदी के सूत्र वाक्यों में देश को एक सूत्र में बांध दिया। सप्तपदी से पीएम ने न केवल सबका साथ मांगा जबकि सबका विश्वास जीतने की भी दिशा में अपने कदम बढ़ाए है। लॉक डाउन से हो रही दिक्कतों का एहसास पीएम को है, लेकिन देश बचाने के लिए दूसरा उपाय नहीं। सीमित संसाधन शब्द का प्रयोग पीएम ने कुल सात बार किया। इस शब्द से पीएम ने लॉक डाउन की मजबूरी बताई है। आर्थिक दिक्कतों का हवाला देने के साथ हर किसी की जिम्मेदारी इतनी आसानी से तय कर देना, मोदी के ही बस का है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के बनाए गए कानून व संविधान का जिक्र कर मोदी ने अंतिम व्यक्ति तक अपनी बात पहुंचाने में सफल जरूर नजर आए। गमछे लपेट कर नमस्कार फिर गमछा नीचे कर संबोधन करते हुए पीएम ने यह बताने की कोशिश की, सरकार पहले से ही इस महामारी से लड़ने की दिशा में प्रयास कर दिए थे। वह प्रयास कारगर भी साबित हुए है। लॉक डाउन बढ़ने से दिक्कतें जरूर होगी लेकिन अब नित्य भारत में आ रहे नए केस की रोकथाम के लिए निश्चित ही लाकडाउन अचूक रामबाण साबित होगा। सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया की मूल भावना को धारण कर तीन मई तक लॉक डाउन का पालन करें और कोरोना को हराए।

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