अयोध्या : पद्मश्री अवार्ड से नवाजे जाएंगे लावारिश लाशों के वारिश शरीफ चचा..जाने आप भी कौन है ये फरिश्ता

हिंदू हो या मुसलमान, शरीफ चाचा दे रहे हैं सभी मृत लोगों को सम्मान

नोट : खबर पढ़ने से पहले इस संदेश को सुने।

अयोध्या ! वर्ष 2020 के पद्मश्री अवॉर्ड के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है। इस साल 21 लोगों को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किए जाएंगे। इसमें मोहम्मद शरीफ नाम के एक शख्स भी शामिल हैं जिन्हें इस सम्मान से नवाजा जा रहा है। इनकी कहानी काफी भावुक करने वाली है। वे पिछले 25 सालों से अयोध्या में लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं।वह पूरे अयोध्या में शरीफ चाचा के नाम से मशहूर हैं।हमारा खून एक जैसा है और मेरी मोहब्बत किसी जाति या धर्म तक सीमित नहीं है।’

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शरीफ को अब तक कई सरकारों और गैर-सरकारी संस्थाओं से प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं। शरीफ पेशे से साइकल मेकैनिक हैं और रोज़ाना कब्रिस्तान और शमशान भूमि के बीच चक्कर काटते रहते हैं।जब शरीफ से यह पूछा गया कि आखिर उन्होंने सेवा का यही तरीका क्यों चुना? तो शरीफ ‘चाचा’ फरवरी 1992 में अपने बेटे की मौत को याद करते हुए कहते हैं, ‘मोहम्मद रईस खान मेरा बड़ा बेटा था जो केमिस्ट के तौर पर काम करने के लिए सुल्तानपुर गया था लेकिन एक महीने तक गायब रहा।बाद में एक बोरे से रईस की लाश मिली। उसकी हत्या कर दी गई थी। बस तभी से मैंने यह फैसला किया कि अब किसी भी लावारिस लाश को सड़क पर नहीं सड़ने दूंगा।’मोहम्मद शरीफ तभी से अपने कुछ पड़ोसियों के सहयोग से यह मानव सेवा का काम कर रहे हैं। हालांकि इस सेवा में वह पैसे की कमी से भी जूझते हैं लेकिन वह कैश में दिया गया दान और कफन ही होते हैं जिसके जरिए शरीफ चाचा यह सेवा कर पा रहे हैं।

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