यूपी चुनाव 2027 : बूथ प्रबंधन को भाजपा ने बनाया जीत का सबसे बड़ा हथियार
1981 मंडलों में उतारे गए 2000 अनुभवी कार्यकर्ता, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

फोटो-एआई प्रतीकात्मक
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली जीत से उत्साहित भाजपा अब पूरी ताकत के साथ यूपी फतह की रणनीति पर जुट गई है। पार्टी ने बूथ प्रबंधन को सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाते हुए प्रदेश के 1981 मंडलों में दो हजार अनुभवी कार्यकर्ताओं को मैदान में उतार दिया है।भाजपा नेतृत्व ने इन कार्यकर्ताओं को बूथ कमेटियों के सत्यापन, सामाजिक समीकरणों की पड़ताल तथा जीत-हार के प्रमुख कारणों का आकलन कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक कार्यकर्ता को संबंधित मंडल में करीब दस दिन प्रवास कर स्थानीय राजनीतिक माहौल और संगठन की स्थिति का अध्ययन करना होगा।पार्टी संगठन गाजियाबाद, लखनऊ और कानपुर में प्रारंभिक बैठकों के जरिए चुनावी होमवर्क तैयार कर चुका है। अब 12 मई को पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन लखनऊ में जिलाध्यक्षों के साथ अहम बैठक करेंगे। बैठक में बूथ प्रबंधन, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति पर मंथन होगा।
बूथ मैनेजमेंट पर भाजपा का विशेष जोर
भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानते हुए बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की योजना बनाई है। पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ नेटवर्क ही चुनावी जीत की सबसे बड़ी कुंजी है।राजनीतिक जानकारों के अनुसार वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में बूथ प्रबंधन की रणनीति के जरिए विपक्ष को घेरते हुए भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। इसके बाद 2017 विधानसभा चुनाव में भी माइक्रोमैनेजमेंट और बूथ स्तर की सक्रियता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत तक पहुंचाया।
सामाजिक समीकरणों पर भी फोकस
सूत्रों की मानें तो पार्टी इस बार बूथ प्रबंधन के साथ-साथ सामाजिक और जातीय समीकरणों पर भी विशेष ध्यान दे रही है। कार्यकर्ताओं को स्थानीय मुद्दों, मतदाता रुझान और विपक्ष की गतिविधियों का फीडबैक जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
भाजपा संगठन का मानना है कि समय रहते बूथ स्तर पर कमियों को दूर कर चुनावी बढ़त हासिल की जा सकती है।

