सोनभद्र : खूनी संघर्ष के पीछे सोसायटी की जमीन, विवाद में आईएएस का भी नाम शामिल

सोनभद्र जिले के मूर्तिया ग्राम पंचायत में खूनी नरसंहार के पीछे सोसायटी की जमीन है। आदर्श कोऑपरेटिव सोसाइटी उभ्भा के नाम करीब 600 बीघा जमीन है। इस सोसायटी का रजिस्ट्रेशन 1978 में ही समाप्त हो चुका था। इस जमीन के खेल में एक आईएएस अधिकारी का भी नाम आ रहा है। गोंड़ बिरादरी के संतोष, रामसकल, इंद्रदेव, मान सिंह, जालिम, पन्नालाल इत्यादि ने बताया कि उनकी बिरादरी के लोग कई दशक से इस जमीन पर जोताई-बुआई कर रहे हैं। इन लोगों ने बताया कि पटना का कोई धीरज नाम का आदमी इस जमीन का ताल्लुकेदार बनकर प्रति बीघे के हिसाब से रुपये वसूलता था।
पिछले साल ग्राम प्रधान यज्ञदत्त सिंह ने करीब 112 बीघा जमीन किसी तरीके से अपने और परिजनों के नाम रजिस्ट्री करा ली थी।
इसके बाद बुधवार को यज्ञदत्त सिंह और उनके पक्ष के 200 लोग जमीन जोतने के लिए पहुंचे।

इस जमीन के खेल में एक आईएएस अधिकारी का भी नाम आ रहा है। चर्चा है कि 1955 में जब मिर्जापुर जिला था और राबर्ट्सगंज तहसील थी, तब यह जमीन आदर्श कोऑपरेटिव सोसायटी के नाम कर दी गई थी। इतना ही नहीं, एक आईएएस के ससुर के नाम पर चलने वाली सोसायटी को जमीन लिखे जाने के बाद 1989 में संबंधित आईएएस, उसकी पत्नी और पुत्री के नाम भी सौ-सौ बीघा जमीन इसी जमीन में से कर दी गई थी।

दोनों पक्षों में चार महीने पहले हुई थी मारपीट :
सोसायटी की इस भूमि का मुकदमा सिविल कोर्ट में चल रहा है। मुकदमे में एक पक्ष ग्राम प्रधान यज्ञदत्त सिंह और उनके परिवार के लोग हैं, जबकि दूसरे पक्ष से गोंड़ जाति के रामजग, कैलाश समेत 75 लोग हैं। बताया गया कि इस जमीन पर 145 व 142 की कार्यवाही पुलिस कर चुकी है। लेकिन 146 की कार्यवाही अभी एसडीएम के यहां लंबित है। करीब चार महीने पहले इसी जमीन को लेकर घोरावल कोतवाली में मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस पर दर्जनों लोगों पर पाबंदी की कार्रवाई की गई थी। यह मामला तहसील दिवस में भी आ चुका है।

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