जीवन के दोष को मिटाती है राम कथा-नारायणी तिवारी

★मवई ब्लॉक के गायत्रीनगर में ब्लॉक प्रमुख राजीव तिवारी द्वारा सजाए गए माँ के दरबार राम कथा का आयोजन।

★अवध धाम की प्रख्यात मानस प्रवक्ता नारायणी तिवारी ने राम की महिमा का किया गुणगान।

★रूदौली सीओ अमर सिंह ने कार्यक्रम का किया शुभारंभ।

पटरंगा(फैजाबाद) ! आध्यात्म से ओतप्रोत संदेश के साथ मधुर आवाज और कर्णप्रिय संगीत की लहरियों के साथ अवध धाम की प्रख्यात कथा प्रवरिका नारायणी तिवारी ने नवरात्र के शुभ अवसर पर मवई ब्लॉक के गायत्री नगर में ब्लॉक प्रमुख राजीव तिवारी द्वारा सजाए गए माँ के दरबार मे आयोजित रामकथा के प्रथम दिन दिव्य रामकथा के महात्म्य का वाचन किया।जिसे कथा प्रेमियों ने सुनकर श्रद्धा व भाव से झूम उठे।

अपनी चिरपरिचित शांत और सौम्य शैली में रामकथा से जुड़े विभिन्न महात्म्य प्रसंगों को जब कथा प्रवक्ता नारायणी तिवारी अपनी कर्णप्रिय आवाज में सुमधुर संगीत के साथ जब उच्चारित करती है तो ऐसा लगता है। जैसे स्वर्ग लोक से स्वयं देवी प्रकट होकर रामकथा का वाचन कर रही है।कथा प्रवक्ता नारायणी तिवारी ने राम कथा महात्म्य के बारे में बताते हुए कहा कि रामायण की मूल कथा जहां एक ओर कई स्तरों पर आदर्श जीवन को परिभाषित करती रही है।वहीं दूसरी ओर इसमें मानवीय संबंधों व अच्छाई- बुराई के संघर्ष के ढेरों रोचक प्रसंग हैं।जो बच्चों से बूढ़ों तक सभी को आकर्षित करते हैं।हमारे देश के सामाजिक ताने-बाने को एक व्यवस्थित रूप देने में इस अद्भुत कथा की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है।आम लोगों के बीच रामकथा बुराई के खिलाफ अच्छाई के संघर्ष और विभिन्न मानवीय संबंधों की गरिमा और गहरी संवेदना के रूप में ही प्रतिष्ठित हुई है।

कथा के दौरान नारायणी तिवारी ने बताया कि।तुलसी दास जी ने जब राम चरित मानस की रचना की,तब उनसे किसी ने पूछा कि आप ने इसका नाम रामायण क्यों नहीं रखा? जबकि यह रामायण ही है। तुलसीदास जी ने कहा, क्योकि रामायण और राम चरित मानस में एक बहुत बड़ा अंतर है।रामायण का अर्थ है राम का मंदिर,राम का घर।जब हम मंदिर जाते हैं मंदिर जाने के लिए नहाना पड़ता है, जब मंदिर जाते हैं तो खाली हाथ नहीं जाते कुछ फूल, फल साथ लेकर जाना होता है। मंदिर जाने कि शर्त होती है कि साफ सुथरा होकर ही जाए।तुलसीदास जी ने कहा कि मानस अर्थात सरोवर,सरोवर में ऐसी कोई शर्त नहीं होती, समय की पाबंदी नहीं होती।कोई भी हो ,कैसा भी हो सरोवर में स्नान कर सकता है।व्यक्ति जब मैला होता है,गन्दा होता है तभी सरोवर में स्नान करने जाता है। इसलिए जो शुद्ध हो चुके हैं, वे रामायण में चले जाएं और जो शुद्ध होना चाहते हैं वे राम चरित मानस में आजाएं।क्योंकि राम कथा जीवन के दोष मिटाती है।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य यजमान व कार्यक्रम आयोजन के संरक्षक राम नरेश तिवारी मुख्य अतिथि रूदौली सीओ अमर सिंह डा0 अल्हण गोंडवी जितेंद्र शुक्ल देवेंद्र शुक्ल विजय मिश्र दीपक शुक्ल अजय शुक्ल के अलावा मवई एसओ रिकेश सिंह पटरंगा थाना प्रभारी बृजेश सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।

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