निष्काम भक्ति से प्रसन्न होते हैं भगवान -स्वामी सुदर्शन जी महाराज , कथा प्रवर ने बताया धर्म का मर्म
धर्मा पैलेस में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन उमड़े श्रद्धालु,कथा के दूसरे दिन स्वामी सुदर्शन महाराज ने निष्काम भक्ति और सत्संग का बताया महत्व।

अयोध्या ! तहसील क्षेत्र के गौरियामऊ स्थित धर्मा पैलेस में बुधवार को श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन अलवर से आए जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी सुदर्शन जी महाराज ने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि समीक ऋषि के गले में मृत सर्प डालने के कारण राजा परीक्षित को ऋषि पुत्र शृंगी ने सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से मृत्यु का श्राप दिया था। इसके बाद राजा ने राजपाट पुत्र जनमेजय को सौंपकर गंगा तट पर प्रभु कथा सुनने का संकल्प लिया।

इसी दौरान शुकदेव जी पहुंचे और राजा को श्रीमद्भागवत का ज्ञान दिया।कथा प्रवर ने श्रीमद्भागवत के श्लोक “स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे” का भाव समझाते हुए कहा कि भगवान के प्रति निष्काम और निरंतर भक्ति ही मनुष्य का परम धर्म है। इससे मन को शांति मिलती है और जीवन सदाचार की ओर बढ़ता है।

कथा के दौरान तोताद्रि मठ के पीठाधीश्वर स्वामी अनंताचार्य जी महाराज की उपस्थिति रही।कार्यक्रम में कृपा निधान तिवारी, कृष्ण हरि आर्य, अजय पाल, ललित गुप्ता, आचार्य रामचंद्र तिवारी, कृष्ण दत्त पाठक, अनिल पाठक, आदित्य पाठक, श्री प्रकाश अतुल कुलदीप आनंद आदेश समेत सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

