ख्वाजाहाल रुदौली रामलीला का वो शिल्पकार, जो हर छोटे बड़े कलाकार को बनाता है महानायक
36 वर्षों से कमलेश मिश्रा ने संभाल रखी है नेपथ्य की कमान, 100 से अधिक कलाकारों को निखारा,कभी खुद राम-लक्ष्मण बने,अब निर्देशन से नई पीढ़ी में जगा रहे अभिनय की अलख।

कैप्शन : कमलेश मिश्रा की फाइल फोटो

रुदौली संवाददाता ! रामलीला के मंच पर कलाकारों को तालियां मिलती हैं, लेकिन उन्हें किरदारों में ढालने वाले शिल्पकार अक्सर पर्दे के पीछे रह जाते हैं।नगर क्षेत्र में प्रसिद्ध ख्वाजा हाल की 137वीं रामलीला के निर्देशक 60 वर्षीय कमलेश कुमार मिश्रा ऐसे ही शख्स हैं, जो 36 वर्षों से अपनी साधना और निर्देशन से कलाकारों की प्रतिभा निखार रहे हैं। उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार खुद सुर्खियों में आना नहीं, बल्कि अपने कलाकारों को मंच पर चमकते देखना है।
हनुमान किला निवासी कमलेश मिश्रा का रामलीला से रिश्ता आठ वर्ष की उम्र में जुड़ा। दो साल लक्ष्मण और फिर 10 वर्षों तक भगवान राम की भूमिका निभाई। बाद में राजा दशरथ और गुरु विश्वामित्र के किरदार भी जीवंत किए। अभिनय का अनुभव अब नई पीढ़ी को तराशने में लगा रहे हैं।कमलेश बताते हैं कि शुरुआत में लालटेन और पीले बल्ब की रोशनी में रामलीला होती थी। आज मंच आधुनिक हो गया है, लेकिन समर्पण कायम है। राजन मिश्रा, पुष्पराज रस्तोगी, आशीष शर्मा और अन्नू अग्रवाल के मुताबिक, कमलेश कलाकारों की छिपी प्रतिभा पहचानने में माहिर हैं। उनके मार्गदर्शन में पंकज आर्य, बृजकिशोर कसौंधन, भानु प्रकाश और अभिषेक मिश्रा समेत 100 से अधिक कलाकार निखरे हैं। आज अक्षत, अक्षांश और श्रेयांस जैसे बाल कलाकार भी उनके निर्देशन में मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

