रुदौली में उत्सव नहीं, लोकोत्सव का रूप ले चुका है शारदीय नवरात्र, 287 पूजा पंडालों में उमड़ी आस्था
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रामलीला, देवी जागरण और नौटंकी से गुलजार रहीं रातें,भेटौरा गांव में किशोरों ने नीम की टहनियां बांधकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश।

फोटो कॉप्शन : भेटौरा गांव में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते बाल कलाकार

रुदौली संवाददाता ! अनिल कुमार मिश्रा ! रुदौली तहसील क्षेत्र में शारदीय नवरात्र अब महज धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि लोकोत्सव का रूप ले चुका है। रविवार को क्षेत्र के दुर्गा पूजा पंडालों में आस्था, भक्ति और लोकसंस्कृति के विविध रंग दिखे। कहीं रामलीला का मंचन हुआ तो कहीं देवी जागरण में रातभर भजन-कीर्तन गूंजते रहे। इसी उल्लास के बीच भेटौरा गांव के किशोरों ने पर्यावरण संरक्षण की अनूठी प्रस्तुति से सामाजिक सरोकार का संदेश दिया।
भेटौरा गांव के ग्रामीणों द्वारा सजाए गए दुर्गा पूजा पंडाल में दर्जनभर किशोरों ने शरीर पर नीम की टहनियां बांधकर मंच पर प्रस्तुति दी।यहां गांव के बल कलाकारों ने ‘पौध लगाओ, वृक्ष बचाओ’ का संदेश देते हुए ग्रामीणों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने की अपील की। कार्यक्रम में पहुंचे मवई ब्लॉक प्रमुख राजीव तिवारी, जंजीत मिश्रा, तेज बहादुर गुप्ता, देवेंद्र शुक्ला और श्यामजी गुप्ता ने बच्चों की पहल की सराहना की। अतिथियों ने आयोजन समिति को सम्मानित भी किया।आप बता दे कि तहसील क्षेत्र में कुल 287 स्थानों पर दुर्गा पूजा पंडाल सजाए गए हैं। इनमें रुदौली कोतवाली क्षेत्र में सर्वाधिक 140, बाबा बाजार थाना क्षेत्र में 62, पटरंगा में 55 और मवई थाना क्षेत्र में 30 पंडाल हैं।
रामलीला से जागरण तक सांस्कृतिक रंग।

क्षेत्र में करीब 27 स्थानों पर रामलीला का मंचन हो रहा है। शाहपुर, शुजागंज, उमापुर, बाबा बाजार, कूढ़ा सादात, रतनपुर, मखदूमपुर, गंजकरी, मवई और लोधनपुरवा समेत 60 से अधिक स्थानों पर देवी जागरण हो रहे हैं। वहीं, 20 से अधिक स्थानों पर नौटंकी का आयोजन लोकसंस्कृति की छटा बिखेर रहा है। धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेशों का यह संगम नवरात्र को जनभागीदारी का उत्सव बना रहा है।

