अयोध्या : गोसाईंगंज एक्सप्रेस में अभय और खब्बू की वेटिंग! किसका टिकट होगा कंफर्म?
भाजपा के टिकट पर दो दावेदार, समर्थकों में दावेदारी की होड़; चुनाव से पहले सियासी मुकाबला दिलचस्प
अयोध्या ! गोसाईंगंज विधानसभा की सियासत में इन दिनों टिकट को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है,कि अभय सिंह या खब्बू तिवारी, आखिर भाजपा किस पर लगाएगी दांव? भाजपा के सियासी एक्सप्रेस में दोनों नेताओं की दावेदारी चर्चा में है, लेकिन टिकट कंफर्म किसका होगा और किसे वेटिंग में रहना पड़ेगा, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है।
गोसाईंगंज सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक किसी एक नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। ऐसे में विधायक अभय सिंह और पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी, दोनों के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं। दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेता को मजबूत दावेदार बता रहे हैं, लेकिन टिकट तो आखिरकार किसी एक को ही मिलेगा।अगर पार्टी इसी सीट से दोनों में से किसी एक को चुनती है।
सपा से भाजपा तक अभय सिंह का सफर, अब टिकट पर निगाहें
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में अभय सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर गोसाईंगंज से विधायक चुने गए थे। उस चुनाव में भाजपा की ओर से इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी मैदान में थीं।हाल ही में अभय सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद गोसाईंगंज की सियासत में नए समीकरण बनने लगे हैं। अभय सिंह की भाजपा से नजदीकियां पिछले कुछ समय से चर्चा में थीं। अब उनके भाजपा में आने के बाद सवाल उठ रहा है कि पार्टी उन्हें गोसाईंगंज से मौका देगी या फिर पुराने दावेदार खब्बू तिवारी पर भरोसा जताएगी।अभय सिंह का कहना है कि पार्टी जिसे भी चुनाव लड़ाएगी, वह उसकी मदद करेंगे। राजनीतिक तौर पर यह बयान पार्टी के प्रति निष्ठा का संदेश देता है, लेकिन टिकट की दावेदारी के बीच इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।
खब्बू तिवारी की दावेदारी को भी नजरअंदाज करना आसान नहीं
दूसरी ओर, इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी भी गोसाईंगंज की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा हैं। उनके समर्थकों की निगाहें भी भाजपा के टिकट पर टिकी हैं।खब्बू तिवारी और अभय सिंह के बीच राजनीतिक मुकाबले का पुराना इतिहास रहा है।ऐसे में अभय सिंह की भाजपा में एंट्री ने टिकट की लड़ाई को और दिलचस्प बना दिया है। अब देखना होगा कि पार्टी पुराने राजनीतिक समीकरणों को तवज्जो देती है या नए सियासी बदलाव के आधार पर फैसला करती है।
2012, 2017 और 2022 का चुनावी इतिहास क्या कहता है?
गोसाईंगंज की सियासत में दोनों नेताओं की टक्कर नई नहीं है।
– 2012: अभय सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते।
– 2017: इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी ने भाजपा के टिकट पर अभय सिंह को हराया।
– 2022: अभय सिंह ने सपा के टिकट पर फिर जीत दर्ज की। भाजपा की ओर से आरती तिवारी मैदान में थीं।
अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अभय सिंह भाजपा में आ चुके हैं और खब्बू तिवारी की दावेदारी भी चर्चा में है। यही वजह है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गोसाईंगंज सीट भाजपा के लिए दिलचस्प राजनीतिक परीक्षा बनती दिख रही है।
असली परीक्षा टिकट मिलने के बाद होगी!
सबसे बड़ा सवाल सिर्फ टिकट का नहीं, बल्कि टिकट कटने के बाद नेताओं के अगले कदम का भी है। यदि पार्टी दोनों नेताओं को अलग-अलग सीटों से मौका देती है, तो तस्वीर कुछ और होगी। यदि गोसाईंगंज से किसी एक को टिकट मिलता है, तो दूसरे नेता की राजनीतिक रणनीति पर निगाहें रहेंगी।क्या टिकट न मिलने के बावजूद दोनों नेता पार्टी के फैसले के साथ खड़े रहेंगे? क्या भाजपा के प्रति उनकी घोषित निष्ठा फैसले की घड़ी में भी कायम रहेगी? या फिर चुनावी महत्वाकांक्षा नए राजनीतिक रास्ते तलाशेगी..?फिलहाल इन सवालों का जवाब भविष्य के गर्भ में है। किसी भी नेता के पार्टी छोड़ने या दूसरे दल से चुनाव लड़ने को लेकर अभी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।गोसाईंगंज की सियासत में फिलहाल टिकट की ट्रेन चल रही है, दोनों दावेदारों की निगाहें कंफर्म सीट पर हैं। अब देखना यह है कि भाजपा का टिकट किसकी झोली में जाता है और किसे इंतजार करना पड़ता है।
KKC News | अयोध्या की सियासत पर पैनी नजर

