अयोध्या : सत्यता को नजर अंदाज कर गरीबों के साथ मजाक कर रही मवई बीडीओ

प्रधानमंत्री आवास के 18 लाभार्थियों में से बीडीओ ने 16 को किया था अपात्र

जबकि डीसी मनरेगा की जांच में 22 लाभार्थियों में से 18 को किया पात्र

मवई के ग्राम सभा अशरफपुर गंगरेला गांव में पीएम आवास का था मामला।

मवई(अयोध्या) ! विकास खंड मवई अंतर्गत ग्राम सभा अशरफपुर गंगरेला गांव में अफसरों द्वारा सर्वे करने के बाद कुल 22 प्रधानमंत्री आवास के लाभार्थियों का चयन किया गया था।लेकिन खंड विकास अधिकारी के जांच में 18 आवास में से 16 को अपात्र घोषित कर दिया था।जिस पर ग्राम प्रधान ने उच्च अधिकारियों से बीडीओ की जांच की शिकायत करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।जिसके उपरांत पुनः जांच डीसी मनरेगा को सौंपी गई।डीसी मनरेगा ने स्वयं मौके पर जाकर जांच की।और 22 लाभार्थियों में से 18 लाभार्थी पात्र की श्रेणी में पाए गए।अब लोग बीडीओ के जांच पर सवाल उठा रहे हैं।लोगों ने कहा कि आखिर बीडीओ को हम गरीबों से क्या दिक्कत है।
जानकारी के अनुसार विकास खंड मवई के ग्राम सभा अशरफपुर गंगरेला गांव में पीएम आवास के लिए लाभार्थियों के चयन को लेकर पहले ग्राम पंचायत सचिव राम नयन यादव, पीडी अयोध्या व ब्लॉक के अधिकारियों ने जांच के बाद 70 व्यक्तियों की सूची में से 22 को पात्र ठहराया था।जिसमें से 10 लाभार्थियों के खातों में धन भी आवंटित कर दिया गया था।और आवास की नींव भी पड़ गयी थी।लेकिन खंड विकास अधिकारी मोनिका पाठक ने जाकर गांव में प्रधानमंत्री पात्र लाभार्थियों का पुनः निरीक्षण कर 18 लाभार्थियों में से 16 को अपात्र घोषित कर दिया।साथ ही आवंटित धनराशि की रिकवरी का फरमान सुना दिया।इतना ही नही बीडीओ ने कहा कि अगर लाभार्थी रिकवरी करवाने की स्थिति में नही है तो ग्राम सचिव को करना होगा।बीडीओ की बात सुनकर आवास लाभार्थियों के पैरों तले से जमीन खिसक गई।लाभार्थी ग्राम प्रधान के साथ मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की।तो प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अफसरों ने मामले की जांच डीसी मनरेगा नगेंद्र मोहन राम त्रिपाठी को सौंपी।डीसी मनरेगा एडीओ पंचायत विकास चंद्र दुबे व ग्राम सचिव राम नयन यादव की तीन सदस्यीय टीम ने गांव जाकर निष्पक्षता से जांच की तो पता चला कि खंड विकास अधिकारी मोनिका पाठक द्वारा जांच के नाम पर गरीबों के साथ घोर अन्याय के साथ ही उनका हक उनसे छीनने का पूरा प्रयास किया गया था।इन्होंने बताया जांच में 22 लाभार्थियों में से 18 लाभार्थी पात्र पाए गए।वही पहली किस्त पा चुकी लाभार्थी रुकसाना बानो पत्नी सलीम अहमद जिन्हें डीसी मनरेगा ने अपात्र करने के साथ ही ग्राम सचिव से कह कर रिकवरी करवाने के लिए निर्देशित किया है।बताया गया कि इनका मकान पहले से ही पक्का कमरा बना हुआ है इसी प्रकार तीन और लाभार्थियों को भी अपात्र कर दिया है।वही ग्रामीण व लाभार्थी पूर्व में जांच करने गयी बीडीओ की जांच पर अब सवाल उठा रहे है कि उन्होंने गरीबो के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों किया आखिर क्या कारण हो सकता है कि 18 में से केवल दो ही लाभार्थी पात्र मिले बाकी सब अपात्र घोषित कर दिया जबकि डीसी मनरेगा की जांच में 22 में से 18 लाभार्थी पात्र पाए गए।इस बावत डीसी मनरेगा नगेन्द्र राम मोहन त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैंने निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट पीडी को भेज दी है जिसमे 22 में से 18 पात्र व 4 पात्र मिले है।बीडीओ की जांच के बाबत बात करने पर इन्होंने बताया कि उन्होंने गरीबों के साथ अन्याय किया था।जबकि 18 लाभार्थी इस योजना के हकदार थे।जिनसे उनका हक छीना जा रहा था।

…कहीं लाभ के चक्कर में पात्र को किया अपात्र

प्रधानमंत्री आवास के पात्र लाभार्थियों को बीडीओ द्वारा अपात्र घोषित कर रिकवरी की धमकी दिए जाने को लेकर तरह तरह के सवाल उठ रहे है।ग्रामीणों का आरोप है बीडीओ ने लाभ के चक्कर में हम गरीबों को अपात्र घोषित कर दिया।हालांकि बीडीओ का कहना है शासन की गाइड लाइन के मुताविक मैंने जांच की और जो सही रहा वही किया।जबकि डीसी मनरेगा ने बीडीओ की जांच को गलत ठहराया है।अब सवाल ये उठता है कि आखिर किस अधिकारी जांच सही और किसकी गलत।आखिर गरीबों के साथ ऐसा घटिया मजाक क्यों।

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