अयोध्या : उर्दू एक जबान ही नही अदब तहजीब व तमद्दुन है-डा0 अनवर

नेवरा गांव में सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

कार्यक्रम में बुजुर्ग शायर शमीम बीबीपुरी व साहित्यकार डा0 अनवर हुसैन हुए सम्मानित

मवई(अयोध्या) : ! साहित्यिक संस्था दबिस्ताने एहले कलम के तत्वाधान में ग्राम नेवरा स्थित अजहर मन्जिल में मुशायरा आयोजित किया गया।जिसकी सदारत बुजुर्ग शायर रहबर ताबानी तथा संचालन सगीर नूरी बाराबंकवी ने किया।इस अवसर पर बुजुर्ग शायर शमीम बीबीपुरी व ख्याति लब्ध साहित्यकार व समालोचक डाक्टर अनवर हुसैन खां को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिये सम्मानित भी किया गया।डाक्टर अनवर हुसैन ने कहा कि उर्दू एक जबान ही नही अदब व तहजीब व तमद्दुन है।इस जबान को किसी कौम या फिरके से जोड़ना गलत है।उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को उर्दू की तालीम दिलायें।इस मौके पर कई शायरों ने अपने कलाम पेश किये। शकील दरियाबादी ने वर्तमान सामाजिक परिवेश का चित्रण इस प्रकार किया।रास्ते हैं पुर खतर मंजिले दुश्वार हैं,कारवाने उम्र के लुटने के सब आसार हैं,जिंदगी में हाल तक पूछा नही जिसने कभी बाद मरने के बेटे वही हकदार हैं।शायर अकील ने इस शेर के जरिये कहा कि तुम न करना कभी गुरबत अना का सौदा उम्र फाको में गुजरती है गुजर जाने दो,बाट लेना मेरे तरके को जरा देर के बाद कब्र में मेरा तो जनाजा तो उतर जाने दो।सिराज मंजर काकोरवी ने सुनाया यह दिल का आइना एक दम छनक कर टूट जाता है जब आंगन में उठी दीवार से घर टूट जाता है।शाहिद जमाल ने कहा कि यहाँ सब बुझाते हैं जहर से जहर की प्यास हम अपने गांव से लेकर निकले हैं शहर की प्यास।शायर मुईद रहबर ने कुछ इस तरह कहा शादाब है चमन मेरा फसले बहार से और क्या तलब करूँ परवर दिगार से।मखमूर काकोरवी ने पढ़ा कि समाज उनको हिकारत की नजर से देखता क्यों है,गरीबी में दो चार बच्चे पाल कर खुश हूं।बुजुर्ग शायर रहबर ताबानी ने यह शेर पढ़ा रगो में बहता हुआ जल तरंग चीख उठा,उठा वो दर्द मेरा अंग अंग चीख उठा।शमीम बीबीपुरी ने अपने खास तरन्नुम व लहजे से यह कलाम पेश किया जिसे स्रोताओं ने खूब सराहा।ये सब की मसर्रत का एहसान उठाये हैं,गम है कि तेरे दिल को सीने से लगाये हैं।जिस जां भी मुकद्दर का लिखा मुझे लाये हैं,साया मेरा खुद मुझको आइना दिखाए हैं।मशहूर शायर इमरान अलियाबादी ने अपने कलाम से स्रोताओं को इस तरह से नवाजा,दिल की फ़ैयाजी बयां,कर देगा दस्तर खाँ मेरा,बन के देखे तो कोई एक दिन मेहमान मेरा।उसकी रहमत के अलावा हस्र के मैदान में कौन उठाएगा भला बारे गमे इसया मेरा।अवधी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर कवि मनीराम अनजान ने अपनी काव्य रचना प्रस्तुत करते हुए यह कहा राम की वंदना,श्याम की वंदना,बुध ईशा से निष्काम की वंदना,गीता कुरआन गुरु ग्रन्थ और बाइबिल ऋग अशर और अजुर शाम की वंदना। हास्य कवि अल्हण गोंडवी ने अपने चुटीले अंदाज में यह पढ़ा, चहु ओर पहाड़े छाई है संसार की बगिया में अल्हण,आशा की फूल की मालाएं लाये है बधाई देने को। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से सेवा निवृत्ति अधिकारी डाक्टर एस एम हैदर एवं पूर्व मेडिकल आफिसर डाक्टर अबरारुल हक उस्मानी ने कहा कि भाषाएं भाव प्रकाशन का माध्यम होती हैं इनको किसी सम्प्रदाय विशेष से जोड़ कर देखना ठीक नही है।इसी तरह उर्दू भाषा एक मीठी जुबान है जिसको परवान चढ़ाने के लिये मुस्लिमो के अलावा दूसरे मजहब के शायर व कवियों ने सराहनीय योगदान किया है। कार्यक्रम की समाप्ति पर मुईद रहबर ने आये हुए लोगों का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर पूर्व ब्लाक प्रमुख मवई निशात अली खां, प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश शुक्ला, एहतराम हुसैन खां शब्बू,डाक्टर एहतिशाम हुसैन खां, एखलाक हुसैन खां, लियाकत अली खां, कौसर हुसैन खां, मास्टर उजैर अहमद आफताब आलम खां, मुमताज खां, मुस्लिम खां, इस्तियाक अहमद, मुकद्दर यादव,तौहीद इस्लाम,इसरत अली, पत्रकार मुजतबा खां आदि लोग उपस्थित थे।

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