अयोध्या : ना मै नग़मा हूँ और ना कोई साज़ हूँ,जो सुनाई ना दे मै वो आवाज़ हूँ-मुजीब रूदौलवी

बे साहारा हूँ बेबस हूँ मजबूर हूँ,हा मै मज़दूर हूँ हा मै मज़दूर हूँ

मशहूर शायर मुजीब रूदौलवी को काँग्रेस पार्टी द्वारा किया गया सम्मानित

रूदौली(अयोध्या) ! नगर अध्यक्ष तारिक़ रूदौलवी ने बताया पूरे लॉक डाउन में कोरोना पर मेरे वालिद मुजीब रूदौलवी ने जो नज़्म लिखी और खुद पढ़ी थी जो लोगों में बहुत मक़बूल हुई और उनकी नज़्म देश ही नही बल्कि बाहरी मुल्कों के लोगो ने भी खूब पसंद किया यह तीसरी सीरीज़ लॉक डाउन और मज़दूर बेसहारा भाई बहनों पर एक दर्द भरी नज़्म मेरे वालिद के दिल से निकली हुई आवाज़ अल्फ़ाज़ बन गई
अभी जल्द ही रुदौली नगर कार्यालय पर एक मीटिंग अल्पसंख्यक विभाग की रखी गई थी जिसमे कांग्रेस पार्टी प्रदेश क्वाडी नेटर अल्पसंख्यक विभाग अख्तर मालिक और अल्पसंख्यक विभाग के अयोध्या इंचार्ज अली अब्बास ज़ैदी रुदौली शरीफ तशरीफ़ लाये थे नगर अध्यक्ष तारिक़ रूदौलवी ने आये हुए अपने काँग्रेस पार्टी के नेताओ से मिलवाया और वही नज़्म सुनाने को कहा तो पूरा माहौल ग़मगीन हो गया अख्तर मकिल ने कहाँ मुजीब रूदौलवी साहब की नज़्म सुनने के बाद मैं इतना नज़्म में खो गया कि मेरे पास शब्द नही बच्चे की मैं क्या बोलूं अख्तर मालिक ने कहां वाक़ई रुदौली शरीफ एक तारीख़ी कस्बा है जहां पर मज़ाज रूदौलवी जैसे अज़ीम शायर हुए हैं जिन्होंने पूरी दुनियां में अपनी शायरी से आज हम सबके दिलों में जिंदा हैं उसके बाद अख्तर अलिक और अली अब्बास ज़ैदी ने मुजीब रूदौलवी साहब को कोरोना योद्धा अवार्ड से नवाज़ा पीसीसी सदस्य राकेश बंसल ने कहा रुदौली में बहुत बहुत बड़े शायर हुई जिन्हों ने उर्दू अदब का नाम दुनियाँ में रौशन किया पर कभी उर्दू शायरी का सौदा नही क्या आज के शायर तो उर्दू अदब के नाम पर सौदा करते पर मुजीब रूदौलवी ने उर्दू अदब की हिफाज़त की रुदौली के बहुत से ऐसे शायर है और थे जिन्हों ने उर्दू अदब की शोहरत हासिल अतीकुर्रहमान सफ्फू ने कहा मुजीब रूदौलवी साहब ने तंगदस्ती मुफ़लिसी के साथ जिन्दगी गुज़ार दी पर अपनी शायरी का और उर्दू अदब का सौदा नही किया पहले शायर का नाम आते ही दो शब्दों का इस्तेमाल होता था कि शायर मुफ़लिस के साथ मुख्लिस भी होता है आज तो शायरी के मतलब ही बदल दिया अगर कोई बुलाता तो पहले अपनी लंबी फीस और साथ मे गाड़ी का इन्तिजाम और ऐशो इशरत भी और मुशायरा पढ़ने के बाद अहसान भी कर जाता है तारिक़ रूदौलवी ने बताया कि मेरे वालिद मुजीब रूदौलवी ने अपनी जिंदिगी में हज़ारो ग़ज़लें नज़्म नात पाक हम्द शरीफ़ कतात और सियासी गीतों में तो में वालिद का कोई सानी ही नही रहा आज भी उनके लिखे हुए गीत मशहूर है और बहुत बड़े बड़े फ़नकार मेरे वालिद के गीत और नज़्म ग़ज़लें पढ़ कर लाखो कमाया होगा पर मेरे वालिद कभी अपने लिखे हुई किसी कलाम पर नाज़ नही क्या बल्कि खुद लिख कर दूसरों को देते थे और आज भी यही करते हैं बस एक चाय और लोगों की वाह वाह ही उनको सारी दौलत मानो मिल जाती है बिल्कुल सादा जीवन साथ मे बेलौस समाज का इतना बड़ा काम करते है पर कभी ज़ाहिर भी नही होने दिया आज भी इस उम्र में वही हिम्मत और कूवत रखते है रखते हैं ग़ज़ल गीत लिखने में इतने आज भी माहिर है कि किसी भी ज़मीन पर 10 मिनट में पूरी ग़ज़ल कहने का हुनर रखते हैं लेकिन किसी तरह का न कोई घमंड न तकब्बुर रखते है तारिक़ रूदौलवी ने बताया कि मेरे वालिद को सन 74 में स्वर्गवासी रामसेवक यादव जी बाराबंकी से रुदौली लेकर आये थे । नगर अध्यक्ष तारिक़ रूदौलवी ने कहा अभी बहुत से और हमारे जो बुज़र्ग शायर है या जिनकी समाज मे कुर्बानिया हैं उनको काँग्रेस पार्टी दुवारा सम्मानित किया जाएगा साथ मे सम्मानित करने वालों में अख्तर मालिक अली अब्बास ज़ैदी राकेश बंसल तारिक़ रूदौलवी अतीकुर्रहमान साफ्फु सिराज मुस्तफ़ा मसरूर खान मो सद्दाम मुजम्मिल खान आसिफ आदिल अहमद कृष्णा कौशल रूमान साकिब वगैरा व बड़ी तादात में काँग्रेस पार्टी के नेता व कार्यकर्ता शामिल थे

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