दिल्ली हिंसा: एकता की गजब मिसाल, किसी ने मंदिर नहीं जलने दिया तो किसी ने मस्जिद नहीं जलने दिया

दिल्ली:जब कुछ उन्मादी लोग अपनी एकता को ढ़ाल बनाकर राजधानी दिल्ली को हिंसा की आग में झोंकने पर आतुर हो गए थे, तब कुछ ऐसे भी नायक रहे, जिन्होंने अपनी एकता को ढ़ाल बनाकर इन दंरिदों को मुंहतोड़ जवाब दिया और फिर पेश की हिंदू-मु्स्लिम की गजब मिसाल, जिन्हें तो तहे दिल से सलाम करने का मन करता है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, चूंकि एक ऐसा ही मामला राजधानी दिल्ली के अशोेक नगर इलाके से सामने आया है, जिसने इस बात की तस्दीक की है कि समाज में नफरतें कितनी भी बढ़ जाए, मगर एकता की इंतहा कभी नहीं हो सकती। स्थानीय लोगों ने मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान उस मंजर को बयां किया, जिससे इस बात की तस्दीक होती है कि कुछेक नापाक लोग समाज में नफरतें फैलाने की लाख कोशिशें क्यों न कर लें, मगर वे अपनी इस कोशिशो में कभी-भी पूर्णत: कामयाब नहीं हो पाएंगे।

इलाके के ही रहने वाले कुछ लोगों ने मीडिया से बातचीत के दौरान गत 25 फरवरी के वाकए को साझा करते हुए कहा कि जब कुछ लोग अशोक नगर की मस्जिद को आग के हवाले करने आए थे तब इलाके के हिंदुओं ने एकजुट होकर मस्जिद को बचाने की कोशिश की। इन मस्जिद के आस पास करीब 10 घरों में मुस्लिम रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, गत मंगलवार को असामाजिक तत्व के लोगों ने मस्जिद को जलाने की कोशिश की। मुस्लिम घरों को जलाने की कोशिश की, मगर ऐसे वक्त में स्थानीय हिंदुओं ने इन मुस्लिमों को अपने घरों में पनाह दिया और तो और मस्जिदों को भी नहीं जलने दिया।

इतना ही नहीं, एकता की पहल महज हिंदू समुदाय की तरफ से ही नहीं की गई, मगर अपनी नायाब एकता की नुमाइश करने में ये मुस्लिम समुदाय भी पीछे नहीं रहा। स्थानीय लोोगं के मुुताबिक, जब मुस्लिम बहुल इलाकोंं में रह रहे हिंदुओं को निशाने बनाने की कोशिश की गई, तो मुस्लिमों ने इन दंगाइयों को रोका। यही नहीं, जब कुछ दंगाई मंदिरों को निशाना बनाने पहुंचे तो मुस्लिमों ने ऐसा करने से रोका। हिंदुओं के घरों को जलने से रोका, जो इस बात की तस्दीक करता है कि हमारे समाज में नफरत की लौ कितनी भी विराट क्यों न हो जाए मोहब्बत और एकता की इंतहा कभी नहीं हो सकती।

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