अयोध्या :कौन है संदीप जिन्हें अयोध्या दर्शन के बिना सीमा से ही प्रशासन ने लौटाया

अयोध्या की सीमा पर रोके गए मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पांडेय,काफी मिन्नतों के बावजूद नही माने प्रशानिक अफसर,एक घंटे तक बातचीत के बाद हाइवे पुलिस चौकी से ही वापस लौट गए संदीप।

मवई(अयोध्या) ! एशिया का नोबल पुरस्कार कहा जाने वाला रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी संदीप पांडेय व सुनीता विश्वनाथ को अपने एक दिवसीय दौरे पर बुधवार को ओफहय आना था।इनके दौरे दौरे को लेकर जिला प्रशासन पहले से ही चौकन्ना हो गया है।और पुलिस प्रशासन ने संदीप व सुनीता को जनपद की सीमा पर स्थित हाइवे पुलिस चौकी पटरंगा में ही रोक दिया।संदीप व सुनीता को महंत युगल किशोर शरण शास्त्री से मुलाकात करनी थी।महंत युगल किशोर शरण शास्त्री जिला अस्पताल में भर्ती हैं।साथ ही संविधान बचाओ मोर्चा का आज प्रेस क्लब में कार्यक्रम भी आयोजित होना था।जिसमे नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रेस क्लब में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था।संदीप और सुनीता को इस कार्यक्रम में भी शामिल होना था।लेकिन जिले का पुलिस प्रशासन आंतरिक सुरक्षा का मामला बताते हुए उन्हें सीमा पर ही रोक दिया।और चौकी पर लगभग एक घंटे तक हुए वार्तालाप के बाद अंततः संदीप पांडेय को बिना अयोध्या जाए वापस ही लौटना पड़ा।

बता दे वर्ष 2002 में दिल्ली से मुल्तान तक भारत पाकिस्तान शांति मार्च निकालने वाले रेमन मैसेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पांडेय सुनीता विश्वनाथ के साथ बुधवार को अयोध्या दौरे पर आ रही थी।लेकिन जनपद में धारा-144 लागू होने पर व अमन चैन कायम रखने की दृष्टि से जिला प्रशासन के अफसर एडीएम प्रशासन संतोष कुमार एसपी ग्रामीण शैलेन्द्र कुमार सीओ सदर निपुण अग्रवाल एसडीएम विपिन कुमार सीओ धर्मेन्द्र सिंह पटरंगा एसओ संतोष सिंह हाइवे चौकी प्रभारी दीपेंद्र विक्रम सिंह एसआई अभिषेक त्रिपाठी हाइवे पुलिस चौकी पर सुबह आठ बजे पहुंच गए।और संदीप पांडेय के वाहन को रोकने के लिए हाइवे पर कैप्सूल बैरियर लगा दिया।अपराह्न लगभग 11:23 पर अपने नैनो कार यूपी-32 डीए-1370 पर सुनीता विश्वनाथ व तीन अन्य के साथ संदीप पांडेय जनपद की सीमा में प्रवेश करते हुए हाइवे पुलिस चौकी पटरंगा पहुंचे।जहां एडीएम प्रशासन व एसपी ग्रामीण की मौजूदगी में पुलिस जवान इनके वाहन को रोक लिया।पुलिस ने कहा जिले में धारा-144 लागू है सुरक्षा व्यवस्था की दुहाई देते हुए अफसरों ने उन्हें वापस जाने को कहा।जिस पर संदीप भड़क गए और कहने लगे कि वे सिर्फ अयोध्या धाम में स्थित हनुमानगढ़ी दर्शन के लिए जा रहे है।उन्हें इस तरह बीच सड़क पर रोककर वापस जाने की बात बिल्कुल ही गलत है ये ठीक नही है।लाख कहने के बावजूद अफसरों ने उन्हें अयोध्या जाने की अनुमति नही प्रदान की।लगभग एक घंटे तक पुलिस व अफसरों से जिरह करने के बाद अयोध्या पुलिस की चाय पीकर संदीप अपने साथियों संग बिना अयोध्या दर्शन किए वापस लौट गए।

आज के युग के गांधी है संदीप-विश्वनाथ

हाइवे पुलिस चौकी पटरंगा पर अफसरों द्वारा संदीप को रोके जाने पर उनके साथ रही सुनीता विश्वनाथ भी भड़क गई।इस दौरान उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी आज तो नही है।लेकिन संदीप पांडेय आज के युग के गांधी है।उन्हें आप अयोध्या दर्शन करने से भला कैसे रोक सकते है।इन्होंने अफसरों की इस हरकत की निंदा करते हुए कहा कि ये बिल्कुल उचित नही है।

कौन है संदीप पांडेय

लखनऊ के रहने वाले डॉक्टर संदीप पांडे पिछले 26 सालों से गरीब बच्चों की शिक्षा और गरीबों के अधिकारों को लेकर उनके हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।आईआईटी बनारस से बीटेक करने वाले डॉक्टर संदीप ने अपनी पीएचडी अमेरिका से की।वापस लौटने पर उनको आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर की नौकरी मिल गई।1991 में नौकरी लगने के बाद अपने दो दोस्त आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉक्टर दीपक गुप्ता व वीजेपी श्रीवास्तवॉय के साथ मिलकर ‘आशा फॉर एजुकेशन।की स्थापना की।करीब डेढ़ साल तक नौकरी करने के बाद डॉक्टर संदीप पांडे ने नौकरी छोड़ बलिया जाकर वहां पर लर्निग सेंटर की शुरूआत की। 1993 में जब उन्होने ये काम शुरू किया तो वहां पर शिक्षा का स्तर काफी गिरा हुआ था। संदीप वहां पर गरीब बच्चों को पढ़ाते और उनका दाखिला सरकारी स्कूलों में करवाते।

समाज मे शांति व भाईचारे के लिए कर चुके अनेक पदयात्रा

डॉक्टर संदीप पांडेय ने समाज में शांति और भाईचारे के लिए अनेक पदयात्राएं निकाल चुके हैं।जिसमें पोखरण परीक्षण के बाद 1999 में पोखरण से सारनाथ तक की पदयात्रा।डेढ़ हजार किलोमीटर की इस पदयात्रा को करने में उनको 88 दिन लगे थे।उन्होने 2002 में सद्भावना के लिए दूसरी पदयात्रा चित्रकूट से अयोध्या तक की।इसके बाद पाकिस्तान के साथ दोस्ती और शांति के लिए पदयात्रा कर वो 2005 में दिल्ली से मुल्तान तक गए। गरीब बच्चों की शिक्षा, परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए निकाली गई पदयात्रा, साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए काम करने और भारत पाकिस्तान के बीच शांति और दोस्ती के लिए निकाली गई उनकी पदयात्रा के लिए उनको साल 2002 में एशिया का नोबेल कहे जाने वाले पुरस्कार ‘रेमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित भी किया गया।

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