यूपी : घाघरा खतरे के निशान से ऊपर, कई गांव में घुसा पानी, प्रशासन अलर्ट

बाराबंकी ! नेपाल के बनबसा बैराज से छोड़े गए पानी से घाघरा उफान पर है। गोंडा में तीन सेंटीमीटर तो बाराबंकी में पांच सेंटीमीटर खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। घाघरा के बढ़ाव से गोंडा और बाराबंकी की सीमा पर बसे गांव कटान की जद में हैं। सैकड़ों बीघा खेत के साथ ही घाघरा का पानी कई गांव की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसे लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।बनबसा बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। गोंडा बाराबंकी की सीमा पर बसे गांव के आसपास नदी लगातार कटान करने में लगी है। सीमा पर बरसे ग्राम नैपूरा और परसावल में लगातार पानी तेजी से भर रहा है। नैपूरा गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। वहीं बहुवन मदार माझा एवं माझा रायपुर का दक्षिणी हिस्सा जलमग्न हो चुका है। ग्राम कमियार, माझा रायपुर, नैपुरा, परसावल के ग्रामीण बांध पर शरण ले चुके हैं। हालांकि अभी घाघरा नदी कई स्थानों पर बांध तक नहीं पहुंच पाई है। मगर खाली पड़ी जमीनों को को काटकर बांध के नजदीक आने को बेताब है।बाराबंकी जिले के ग्राम पारा एवं बेहटा के पास नदी बड़े पैमाने पर कटान कर रही है। और कटान करते हुए बांध की तरफ बढ़ रही है। पारा व बेहटा की ग्रामीणों के मुताबिक खाली पड़ी जमीनों की कटान से कृषि योग्य भूमि कटकर घाघरा में समाहित हो रही है। अभी किसी गांव के चपेट में आने की संभावना नहीं है। ग्राम बेहटा के मजरा चरपुरवा के पास लगातार पानी बढ़ने से लोग गांव छोड़कर बांध के तरफ बढ़ रहे हैं। वही कटान से लोगों में दहशत भी हैं। सिंचाई विभाग के एक्सईएन विश्वनाथ शुक्ला, एई अमरेश कुमार सिंह, जेई एमके सिंह लगातार बांध पर निरीक्षण करते रहे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि घाघरा में पानी बढ़ने के कारण पानी का फैलाव हो रहा है मगर बांध को कहीं से कोई खतरा नहीं है।

कटान भी हुई तेज

बारांबकी जिले में घाघरा अपने खतरे के निशान 106.070 मीटर को पार करके 5 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। घाघरा का पानी गांवों व खेतों में तेजी के साथ घुस रहा है। तराई के सिरौली गुंग, कोठीडीहा, भयाकापुरवा, सनांवा, टेपरा, तेलवारी, सरांय सुर्जन, इटहुवा, कोठरी गौरिया आदि गांवो को तहसील प्रशासन ने सोमवार की रात से ही अलर्ट कर दिया था। ग्रामीण अपनी-अपनी गृहस्थी समेटने मे लगे हैं। कानूनगो लक्ष्मी नरायन त्रिवेदी व लेखपाल अजय रावत आदि राजस्वकर्मी में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए गांव में तैनात हैं।

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