पुण्य, आरोग्य और सूर्य उपासना का पावन पर्व ज्येष्ठ माह की सप्तमी आज , जाने क्या है महत्व

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह की सप्तमी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह दिन मुख्य रूप से भगवान सूर्य नारायण की आराधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास की प्रचंड गर्मी में सूर्यदेव की उपासना करने से रोग, शोक और कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस दिन स्नान, दान, जप और व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास में सूर्यदेव अपनी तीव्रतम ऊर्जा के साथ पृथ्वी पर प्रभाव डालते हैं। ऐसे में सप्तमी तिथि पर उनकी पूजा करने से शरीर को आरोग्यता, मन को शांति और परिवार को समृद्धि प्राप्त होती है।पुराणों में कहा गया है कि इस दिन विधिपूर्वक सूर्य पूजा करने वाले व्यक्ति को नेत्र रोग, त्वचा रोग तथा मानसिक तनाव से राहत मिलती है। साथ ही पितृ दोष और ग्रह बाधाओं में भी कमी आती है।कई स्थानों पर इसे “आरोग्य सप्तमी” और “सूर्य सप्तमी” के रूप में भी मनाया जाता है। किसान वर्ग के लिए भी यह दिन विशेष माना जाता है क्योंकि सूर्य को अन्न और ऊर्जा का आधार माना गया है।
पूजा विधि
1. प्रातःकाल स्नान
ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पवित्र नदी, तालाब या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें,स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
2. सूर्य को अर्घ्य
तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और रोली डालें।उगते सूर्य को “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र बोलते हुए अर्घ्य दें।अर्घ्य देते समय जल की धारा के बीच से सूर्यदेव के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
3. पूजा सामग्री
लाल चंदन,लाल पुष्प,गुड़,गेहूं,तांबे का पात्र धूपदीप और नैवेद्य
4. मंत्र जाप
“ॐ सूर्याय नमः”
“ॐ आदित्याय नमः”
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
5. दान-पुण्य
ज्येष्ठ माह की गर्मी को देखते हुए इस दिन जल, छाता, वस्त्र, खरबूजा, आम, पंखा, सत्तू और शर्बत का दान अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
क्या करें
सुबह जल्दी उठकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।जरूरतमंदों को जल और शीतल वस्तुओं का दान करें।सात्विक भोजन करें।घर में स्वच्छता और शांति बनाए रखें।
गाय, पक्षियों और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।सूर्य मंत्रों और गायत्री मंत्र का जाप करें।
क्या न करें
इस दिन तामसिक भोजन, मांस-मदिरा का सेवन न करें।क्रोध, अपशब्द और विवाद से बचें।किसी का अपमान या अनादर न करें।बिना स्नान किए भोजन न करें।सूर्यास्त के बाद नमकयुक्त भारी भोजन से बचना शुभ माना गया है।जल की बर्बादी न करें।
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि ज्येष्ठ सप्तमी पर सच्चे मन से सूर्यदेव की आराधना करने वाले व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं। यह तिथि स्वास्थ्य, तेज और आत्मबल प्रदान करने वाली मानी गई है।आपको बता दे ज्येष्ठ माह की सप्तमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य और जल के महत्व को समझने का संदेश भी देती है। भीषण गर्मी के बीच यह पर्व सेवा, दान और संयम की प्रेरणा देता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई सूर्य उपासना जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करती है।

