बाराबंकी : 40 दिन बाद कब्र से निकाला गया मो0 सैफ का शव, पहचान में लापरवाही पर उठे सवाल
डीएम के आदेश पर हुई कार्रवाई, पोस्टमार्टम के लिए लखनऊ भेजा गया शव,परिजनों का आरोप- हाथ पर लिखा था नाम, फिर भी अज्ञात मानकर दफना दिया; पुलिस का पक्ष आना बाकी

बाराबंकी ! करीब 40 दिन पहले सफेदाबाद रेलवे क्रॉसिंग के पास अज्ञात अवस्था में मिले 18 वर्षीय मो. सैफ के शव को शुक्रवार को जिला प्रशासन की निगरानी में कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए लखनऊ भेजा गया। यह कार्रवाई जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के निर्देश पर नायब तहसीलदार सदर (देवा), थाना जहांगीराबाद पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कराई गई।
जानकारी के अनुसार, लखनऊ के सआदतगंज निवासी मो. सैफ 14 जून की रात संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों ने 17 जून को गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसी बीच 15 जून को बाराबंकी के सफेदाबाद रेलवे क्रॉसिंग के पास एक अज्ञात युवक का शव मिला था। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद पहचान न होने का हवाला देते हुए 19 जून को थाना जहांगीराबाद क्षेत्र के सोता कब्रिस्तान में शव को दफना दिया था।बाद में मृतक के पिता मो0 आसिफ ने शव की पहचान अपने बेटे के रूप में करते हुए हत्या की आशंका जताई। इस संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी होने और उनके जेल भेजे जाने की बात भी सामने आई है। पहचान की पुष्टि और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन ने शव को कब्र से निकलवाने का निर्णय लिया।शव निकलवाने के दौरान परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मृतक के हाथ पर “सैफ” नाम अंकित था, इसके बावजूद पहचान सुनिश्चित करने का गंभीर प्रयास नहीं किया गया। यदि गुमशुदगी के रिकॉर्ड का समय रहते मिलान किया जाता और बरामद शव की तस्वीर सार्वजनिक की जाती, तो परिवार को अपने बेटे का अंतिम दर्शन करने के लिए 40 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता।परिजनों ने पोस्टमार्टम और पंचनामा से जुड़े पुलिस कर्मियों पर भी फाइल आगे बढ़ाने में अनावश्यक विलंब करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रशासनिक आदेश के बावजूद प्रक्रिया में देरी हुई और संबंधित पुलिसकर्मी समय से मौके पर नहीं पहुंचे।हालांकि, इन आरोपों पर बाराबंकी पुलिस की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों पर पूरे मामले की आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।

