July 20, 2026

सावन से पहले मेहरबान हुए मेघ, खेतों में लौटी रौनक, धान की रोपाई और पौधरोपण को मिला संबल

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मानसूनी फुहारों से उमस भरी गर्मी से राहत, किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान,घाघ की कहावत चरितार्थ होती दिखी, वन विभाग बोला- लगातार बारिश से पौधों की होगी बेहतर बढ़वार।

रुदौली,अयोध्या ! सावन माह की दस्तक से पहले ही मानसून की फुहारों ने क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदल दिया है। पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जहां लोगों को उमस और चिपचिपी गर्मी से राहत दिलाई है, वहीं खेतों में भी नई जान फूंक दी है। धान की रोपाई ने रफ्तार पकड़ ली है और किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों में उतर गए हैं। पर्याप्त नमी मिलने से कृषि कार्यों में तेजी आई है, जिससे इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद भी बढ़ गई है।ग्रामीण अंचलों में इन दिनों खेतों में महिलाओं और पुरुषों की टोली धान की रोपाई में जुटी दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि समय पर हुई बारिश धान की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बुजुर्ग किसान इसे लोककवि घाघ की प्रसिद्ध कहावत-“आषाढ़ बरसे, सावन हरियाय, किसान के मन आनंद समाय” से जोड़कर देखते हैं। उनका मानना है कि यदि सावन की शुरुआत तक इसी तरह बारिश का क्रम बना रहा तो खरीफ की फसल बेहतर होगी।बारिश का लाभ केवल खेती तक ही सीमित नहीं है। प्रदेशव्यापी पौधरोपण अभियान को भी इससे नई गति मिलने की उम्मीद है। वन विभाग का मानना है कि मिट्टी में पर्याप्त नमी होने से लगाए जाने वाले पौधों के जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।वन विभाग के रुदौली डिप्टी रेंजर नरेंद्र राव ने बताया कि बसौड़ी पौधशाला से ग्राम पंचायतों द्वारा लगातार पौधों की उठान की जा रही है। यदि अगले एक सप्ताह तक मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो लगाए गए अधिकांश पौधे अच्छी तरह स्थापित हो जाएंगे और पौधरोपण अभियान को अपेक्षित सफलता मिलेगी।कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि समय पर हुई मानसूनी बारिश धान जैसी खरीफ फसलों के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है। ऐसे में सावन से पहले मेघों की मेहरबानी ने खेती – किसानी के साथ-साथ हरियाली बढ़ाने के अभियान को भी नई ऊर्जा प्रदान की है। ग्रामीण अंचलों में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मानसून का यह सिलसिला आगे भी इसी तरह बना रहे।

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