निर्जला एकादशी आज: एक व्रत से मिलता है सभी एकादशियों का पुण्यफल, जानिए महत्व, कथा और पूजन विधि
भीमसेन से जुड़ी है निर्जला एकादशी की पौराणिक कथा।भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का महापर्व।जलदान, अन्नदान और सेवा को बताया गया विशेष पुण्यकारी।

अयोध्या ! ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली निर्जला एकादशी सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है। इसे सभी 24 एकादशियों का फल प्रदान करने वाली एकादशी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु वर्ष भर किसी कारणवश सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते, वे निर्जला एकादशी का व्रत करके समस्त एकादशियों के पुण्यफल के भागी बन सकते हैं।सनातन परंपरा के अनुसार इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु पूरे दिन अन्न और जल का त्याग कर व्रत रखते हैं तथा भगवान विष्णु का स्मरण, भजन, कीर्तन और ध्यान करते हैं।
क्या है निर्जला एकादशी की कथा?
प्राचीन कथाओं के अनुसार महाभारत काल में जब महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को सभी एकादशियों का व्रत रखने का उपदेश दिया, तब भीमसेन ने अपनी अधिक भूख का उल्लेख करते हुए असमर्थता जताई। तब उन्हें केवल ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का निर्जल व्रत रखने का निर्देश दिया गया। भीमसेन द्वारा इस व्रत को करने के कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
निर्जला एकादशी का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि निर्जला एकादशी का व्रत मन, वचन और कर्म की शुद्धि का माध्यम है। यह व्रत संयम, आत्मनियंत्रण और जल के महत्व का बोध कराता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा अनेक गुना फलदायी होती है।
पूजन विधि
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में जागकर स्नान करें।स्नान के जल में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है।घर के पूजास्थल में भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का पूजन करें।पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप एवं नैवेद्य अर्पित करें।”ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।दिनभर यथाशक्ति व्रत रखकर भगवान का ध्यान करें।संध्या के समय आरती एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
दान का विशेष महत्व
निर्जला एकादशी पर जल से भरा घड़ा, पंखा, फल, अन्न, वस्त्र एवं शीतल पेय पदार्थों का दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। जरूरतमंदों की सहायता और गौसेवा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
आचार्य अर्जुन तिवारी ने बताया
अयोध्या के बड़ागांव स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर के संरक्षक एवं श्रीमद्भागवत कथा प्रवक्ता आचार्य अर्जुन तिवारी ने कहा कि निर्जला एकादशी केवल व्रत का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का अवसर है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति यथाशक्ति निर्जल व्रत करें, जबकि बालक, वृद्ध और रोगी अपनी क्षमता के अनुसार जल ग्रहण कर भी यह व्रत कर सकते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आराधना कर लोककल्याण और विश्व शांति की प्रार्थना करने का आह्वान किया।

