अवध की 84 कोसी परिक्रमा कर मनुष्य 84 लाख योनियों से होता मुक्त-महंत गयादास।

मखभूमि मखौड़ा धाम से शुरू हुई अवध की 84 कोसी परिक्रमा अपने बारहवें पड़ाव पर।

गुरुवार की सुबह 9 :13 मिनट पर धर्म ध्वज को लहराते परिक्रमार्थी पहुंचे पटरंगा

पटरंगा(अयोध्या) ! महाराजा दशरथ की पुत्रेष्ट यज्ञस्थली मखभूमि मखौडा धाम जिला बस्ती के मनोरामा स्थान से 17 अप्रैल को शुरु हुई विश्व प्रसिद्ध अवध की 84 कोसी परिक्रमा गुरुवार को अपने बारहवें पड़ाव पटरंगा पहुंची।परिक्रमा में सामिल साधु संत और श्रद्धालुओं का जत्था जैसे ही कमियार स्टेट की नगरी गायत्री नगर पटरंगा पहुंची।जय श्री राम,सीताराम,के गगनभेदी उदघोष से पूरा क्षेत्र मानों राममय हो गया।गायत्रीनगर व पटरंगा मंडी वासी मवई ब्लॉक प्रमुख राजीव तिवारी व रामपति गुप्त अवधेश गुप्ता की अगुवाई में संत दर्शन व उनके स्वागत के लिये दौड़ पड़े।और परिक्रमा की अगुवाई कर रहे परिक्रमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष/संचालक महंत गायदास जी महाराज की आरती व माल्यार्पण कर स्वागत किया।तत्पश्चात सभी परिक्रमार्थियों को एल0आर0के0 इंटर कालेज के विशाल प्रांगण में विश्राम करवाया।परिक्रमा संचालक महंत गायदास ने बताया यहाँ रात्रि विश्राम के बाद शुक्रवार की भोर परिक्रमा में शामिल साधु संत और भक्त जन पूजा-अर्चना के बाद भगवान श्रीराम का जयघोष करते हुए धर्म ध्वज लहराते परिक्रमा के अगले पडाव बाराबंकी जनपद के टिकैतनगर थाना अन्तर्गत भगत बाग के लिये रवाना होंगे।

इस वर्ष परिक्रमा में साधु संतो और श्रद्धालुओं की भीड़ कम रही जबकि गत वर्षों में इस परिक्रमा में एक से डेढ़ हजार श्रद्धालु सामिल होते रहे।परिक्रमा में साधु संतों के साथ बडी संख्या में महिला श्रद्धालु शामिल हैं।इन्होंने आगे बताया कि प्रत्येक वर्ष निकलने वाली विश्व विख्यात अवध धाम की ये 84 कोसी परिक्रमा बस्ती जिले के मखौडा धाम से शुरू होकर अम्बेडकर नगर, फैजाबाद, बाराबंकी और गोण्डा जिले के भगवान श्री राम से जुडे स्थलों से होते हुए आगामी 10 मई मंगलवार को रामार्चा महायज्ञ के साथ समाप्त होगी।और 11 मई को सीताकुंड अयोध्या में भंडारा होगा।साथ परिक्रमार्थियों की विदाई होगी।उन्होंने परिक्रमा की महत्ता के सम्बन्ध मे बताया है कि अवध धाम की इस परिक्रमा को करने से मनुष्य को 84 लाख योनियों के जन्म से मुक्त मिल जाती है।परिक्रमा का यह प्रक्रिया सनातन काल से चली आ रही है।त्रेता युग के रामावतार में भगवान श्री राम जिन रास्ते से चलकर ऋषियों-मुनियों की सहायता किए और राक्षसों का संहार किए उन्हीं रास्तों से होकर यह यात्रा गुजरती है।मोक्षदायिनी इस परिक्रमा से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं।इन्होंने आगे बताया कि अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए मखौड़ा में मनोरमा नदी के पवित्र तट पर श्रृंगीऋषि की देख-रेख में पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया था।इस यज्ञ के पूरा होने के बाद उन्हें चार पुत्रों भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की प्राप्ति हुई थी।तभी से मखौड़ा धाम में प्रत्येक वर्ष मेला लगता है और चौरासी कोसी परिक्रमा का शुभारम्भ और अंत में परिक्रमा का समापन भी मखौड़ा धाम में होता है।

ब्लॉक प्रमुख सहित मंडी के व्यापारियों ने कराया जलपान

पटरंगा ! परिक्रमार्थियों के आवभगत के लिये मवई ब्लॉक प्रमुख राजीव तिवारी ने सुबह से शाम तक विश्राम स्थल पर मौजूद रहकर जलपान फलाहार के अलावा गन्ने का जूस आदि वितरित करवाते रहे।मंडी के प्रसिद्ध सेठ श्यामू गुप्ता कामता प्रसाद अवधेश गुप्त रमापति गुप्त पंडित अशोक मिश्र की अगुवाई में ओंकारनाथ गुप्त रामनेवास गुप्त रमेशचंद्र गुप्त निखिल बंका विजय मिश्र राम नरेश गुप्त मनीष गुप्त सुनील सोनी पप्पू बंका आदि लोग पूरे दिन संतो की सेवा करते हुए शाम को भोजन कराया।

चिकित्सा व सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पटरंगा ! गुरुवार को 84 कोसी परिक्रमार्थियों का जत्था पटरंगा मंडी पहुंचा।यहाँ स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व चिकित्सा के कड़े इंतजाम किये गए थे।सीएचसी मवई प्रभारी डा0 रविकान्त के निर्देशन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पटरंगा की छः सदस्यीय डॉक्टरों की टीम परिक्रमार्थी विश्राम स्थल पर कैम्प लगाकर लोंगो को दवाइयां वितरित करते रहे।साथ ही दो एम्बुलेंस की गाड़ी में मौके पर मौजूद रही।इसके अलावा आशीष मिश्र व होम्योपैथ चिकित्सक डा0 कृष्ण गोपाल वैश्य अपनी टीम के साथ संतो की सेवा में जुटे रहे।सुरक्षा के मद्देनजर पटरंगा थानाध्यक्ष विवेक सिंह ने एक उपनिरीक्षक व दो कांस्टेबल सहित छः होमगार्ड को तैनात किया था।

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