यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर सरगर्मियां तेज हो गई है। वजह कि 25 दिसंबर को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यही नही 25 दिसम्बर की अर्धरात्रि से प्रधानों के खाते पर रोक भी लगा दी जाएगी। इस बाबत पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश भी जारी कर दिया है। यह आदेश से मौजूदा ग्राम प्रधानों के लिए झटका माना जा रहा है क्योंकि इनकी मांग थी कि चुनाव तक इसपर रोक ना लगाया जाए इससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

23 दिसम्बर को जारी अपने आदेश में निदेशक ने जिलाधिकारियों को आदेशित किया है कि पंचम राज्य वित्त आयोग तथा 15वें वित्त आयोग से धनराशि के अंतरण पर 25 दिसम्बर की अर्धरात्रि के बाद संचालन पर रोक लगाने की अपेक्षा की गई है। आदेश के मुताविक सभी ग्राम पंचायतों के खाता को नियत तिथि के बाद तत्काल अनरजिस्टर्ड करने का आदेश दिया गया है। इसकी जिम्मेदारी एडीओ पंचायत को सौपी गयी है। साथ ही यह निर्देश दिया गया है उक्त तिथि के बाद शासन द्वारा नामित अधिकारी ही ग्रामपंचायतों के खाते का संचालन कर सकता है। निदेशक ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद किसी भी ग्राम पंचायत के प्रधान द्वारा एफटीओ अप्रूव किया जाता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सम्बंधित सचिव, बीडीओ और जिला पंचायत राज अधिकारी की होगी। डीपीआरओ शशिकांत पांडे ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सभी बीडीओ को इससे सम्बंधित निर्देश जारी कर दिया गया है।

कोरोना के चलते समय से नहीं हो सका चुनाव

त्रिस्तरीय पंचायत का कार्यकाल 25 दिसम्बर को पूरा हो रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस बार समय से सम्पन्न नहीं कराया जा सका। अब सरकार मार्च में चुनाव कराने का पूरी तरह मन बना चुकी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार ग्रामपंचायतों व वार्डो के परिसीमन का कार्य अंतिम चरण में है। इसके बाद जल्द ही आरक्षण का फार्मूला भी तय कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि फरवरी के दूसरे सप्ताह तक ग्रामसभाओं का कोटिवॉर आरक्षण भी पता चल जायेग। वहीं जिला पंचायत के वार्डों के आरक्षण की जानकारी फरवरी के तीसरे सप्ताह मिल पाएगी।

मतपत्रों से होगा चुनाव

इस बार ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य के साथ साथ जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी कराया जाएगा। जो मतपत्र के सहारे कराया जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने तैयारियां भी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि पिछले बार ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव एक साथ और क्षेत्र पंचायत सदस्य- जिला पंचायत सदस्य के चुनाव अलग-अलग हुए थे। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल दिसंबर में, क्षेत्र पंचायत सदस्य का कार्यकाल जनवरी में और जिला पंचायत सदस्य का कार्यकाल मार्च में खत्म हो रहा है। कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासनिक अधिकारी कार्यभार संभालेंगे।

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