सोहावल(अयोध्या):जीव आत्माओं के उद्धार के लिए सत्संग है जरूरी-रतन दास-राजेन्द्र तिवारी

जिह्नवा के स्वाद के लिए मानव कर रहा है हिंसा

मथुरा से आए जयगुरुदेव बाबा रतन दास द्वारा किया सत्संग

अयोध्या : जिले के सोहावल तहसील अंतर्गत समदा झील के पास बाबा जयगुरुदेव का सत्संग समागम हुआ,इस दौरान सात नव युगल जोड़ो का सामूहिक विवाह भी संपन्न कराया गया।जीव आत्माओं के उद्धार के लिए सत्संग जरूरी है।यह उद्गार बाबा रतन दास ने सोहावल तहसील के समदा झील के पास आयोजित सत्संग समागम में करीब लाखों की संख्या में मौजूद भक्तों से कही।सैकड़ो बीघे भूमि में आयोजित सत्संग समागम में देश-विदेश से लेकर हजारों की संख्या में पहुंचे क्षेत्रीय जन मानस ने भी भक्ति रूपी गंगा में डुबकी लगाई।

समदा झील के पास आयोजित जय गुरुदेव सत्संग समागम के दौरान मथुरा से आए जयगुरुदेव बाबा रतन दास ने कहा कि इस भारत भूमि पर साढ़े सात सौ वर्ष पहले संतो की वजह से मानव प्राणी को सतनाम सुनने का सुअवसर मिला है।उन्होंने कहा कि कलयुग में संत शिरोमणि कबीरदास ने जीव आत्माओं के उद्धार के लिए सबसे पहले शिष्यों के बीच सत्संग की शुरुआत किया था। बाबा रतन दास ने कहा कि अपनी सौतेली माता कैकेयी के कहने पर भगवान राम ने 14 वर्ष का वनवास और राजगद्दी का परित्याग कर दिया।आज अपनी सगी मां जिसकी कोख से बच्चा जन्म लेता है। उसकी आज्ञा की अवहेलना कर रहा है।वृद्ध और लाचार माता -पिता वृद्धा आश्रम पहुंचाए जा रहे है।जबकि एक श्रवण कुमार थे।जो अपने कंधे के बल पर अकेले अपने माता- पिता को लेकर तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े थे।

बाबा ने कहा दुनिया में सब कुछ मिल जाएगा। लेकिन एक कोख का जन्मा सगा भाई कभी नही मिलेगा। लेकिन आज सगा भाई ही भाई का शत्रु बन बैठा है।यह सारा हिंदुस्तान ऋषि मुनियों की तपोभूमि है।भारत देश शाकाहारी,ब्रम्हचारी और सदाचारियों की भूमि है।जबकि आज मानव चौमुखी अपराध कर रहा है। इसलिए धर्म की स्थापना और जीव आत्माओं के उद्धार के लिए सत्संग जरूरी है।जिस देश का नाम एक मार्यादित धर्म परायण राजा भरत के नाम से भारत पड़ा। जहां राम-कृष्ण बनकर दर्जनों बार धर्म की रक्षा के लिए मानव स्वरूप में भगवान ने अवतार लिया है।आज उस पवित्र भारत माता की भूमि पर मानव हिंसा को जिह्वा का स्वाद बना रहा है।बाबा रतन शाह ने कहा कि जहां जहां धर्म ग्रंथ की चर्चा,भागवत कथा और घर-घर में रामायण गीता व कुरान होता है।जगह-जगह धर्म की चर्चा हो रही है।जहां संत पुरुषों जा जन्म हुआ है।वहां अधर्म फल फूल रहा है।अधर्म का कार्य बढ़ रहा है।किसी की बहन बेटी से छेड़खानी हो रही है।अत्याचार चरम पर बढ़ रहा और अपनी जिह्वा के स्वाद के लिए मानव पशु-पक्षियों को मारकर खा रहा।धर्म की मर्यादा नष्ट की जा रही है।पाप हंस रहा है और धर्म रो रहा।ऐसे में मानव के आचरण को शुद्ध करने के लिए और उसे सदाचारी बनाने के लिए संत समाज को आगे आने की जरूरत है।अब भारत देश मे मर्यादा को सुरक्षित करने और मानव समाज मे अज्ञानता को मिटाने के लिए गुरु रूपी सतगुरु का सहारा लोंगो को लेने की जरुरत है।सत्संग समागम के दौरान देश के कई शहरों से आये सात जोड़ो का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ और दहेज मुक्त हुए इस सामूहिक विवाह में बाबा रतन दास ने नव युगल जोड़ो को आशीर्वाद प्रदान किया।नशा मुक्ति,मांस मंदिरा के सेवन पर रोक और मानव समाज को सतकर्म करने के लिए प्रेरित करने वाले इस सत्संग समागम की चारों तरफ चर्चा हो रही है।

जबकि रविवार को आयोजित भंडारे में दर्जनों गांवों के हजारों लोंगो ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।19 मार्च को निकली शोभायात्रा के बाद कल बाबा जयगुरुदेव के सतसंग के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।प्रवचन सत्संग की कुछ तस्वीरें और वीडियो।जिसमें नेपाल उड़ीसा,राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार,झारखंड से लेकर कई प्रदेश के बाबा के अनुनायियों ने सत्संग में शिरकत किया।पांच दिनों तक चले कार्यक्रम में लाखों की संख्या में पहुंचकर लोंगो ने आस्था और भक्ति रूपी बह रही गंगा में स्नान किया।

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