May 30, 2026
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विकास कार्यों और शहरीकरण की दौड़ में हरित क्षेत्र लगातार सिमटे,122 करोड़ पेड़ों के अंतर ने बिगाड़ा पर्यावरणीय संतुलन, विशेषज्ञों ने जताई चिंता।

नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी, अनियमित वर्षा, जल संकट और जलवायु परिवर्तन के पीछे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। हाल ही में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पर्यावरण से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण में यह दावा सामने आया है कि पिछले 25 वर्षों के दौरान देश में लगभग 384 करोड़ पेड़ों की कटाई की गई, जबकि इसके मुकाबले केवल 262 करोड़ पौधे ही लगाए जा सके।रिपोर्ट्स के अनुसार देश में वर्तमान समय में कुल पेड़ों की संख्या लगभग 35 अरब आंकी जाती है, लेकिन विकास परियोजनाओं, सड़क निर्माण, औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण और अन्य निर्माण कार्यों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों का सफाया किया गया है। चिंताजनक बात यह है कि कटे हुए पेड़ों के मुकाबले लगाए गए पौधों की संख्या काफी कम रही, जिससे करीब 122 करोड़ पेड़ों का अंतर पैदा हो गया।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। कई स्थानों पर वृक्षारोपण अभियानों के बावजूद पौधों की जीवित रहने की दर संतोषजनक नहीं रही है।विशेषज्ञों के अनुसार हरित क्षेत्र में लगातार कमी और कंक्रीट के जंगलों के विस्तार ने प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर तापमान वृद्धि, भूजल स्तर में गिरावट, जैव विविधता के नुकसान और मौसम के बदलते स्वरूप के रूप में दिखाई दे रहा है।पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। उन्होंने बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, वन संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विस्तार को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया है।

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