November 3, 2026

अब बिहार की नदियों की गाद से बनेंगे हाईवे, बाढ़ से भी मिलेगी राहत, CM सम्राट चौधरी की मौजूदगी में MoU पर हस्ताक्षर

अब बिहार की नदियों की गाद से बनेंगे हाईवे, बाढ़ से भी मिलेगी राहत, CM सम्राट चौधरी की मौजूदगी में MoU पर हस्ताक्षर

<span class="img-name">बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के बीत MoU </span> <span class="img-source">Image Source : X (@SAMRAT4BJP) </span>

बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ और नदियों में जमा होने वाली सिल्ट यानी गाद को लेकर एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच ‘बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापना एवं गाद प्रबंधन नीति 2026’ के तहत एक अहम एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुए इस समझौते के तहत अब नदियों और जलाशयों से वैज्ञानिक तरीके से निकाली गई गाद का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और भराई में किया जाएगा। गाद प्रबंधन नीति लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है।

ये पूरे देश के लिए एक मॉडल- नितिन गडकरी

नदियों में गाद का जमाव बिहार में जलप्रवाह की सबसे बड़ी रुकावटों में से एक रहा है। इसी संकट को संसाधन में बदलने के लिए बिहार सरकार और केंद्र के बीच एक साझा सहमति बनी है। 17 सितंबर 2026 को अधिसूचित राज्य की नई सिल्ट प्रबंधन नीति के तहत अब एनएचएआई की सड़क परियोजनाओं में खेतों की उपजाऊ मिट्टी की जगह नदियों से निकाली गई तलछट का इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे देश भर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल करार दिया है।

इस समझौते से क्या लाभ होगा?

तकनीकी दृष्टिकोण से इस नीति का सबसे बड़ा लाभ दोतरफा है। पहला- सड़क निर्माण के लिए किसानों के उपजाऊ खेतों से मिट्टी निकालने की निर्भरता घटेगी, जिससे कृषि भूमि का कटाव रुकेगा। दूसरा- नदियों के संकरे हिस्सों, संगमों और बराजों के पास जमा तलछट हटने से स्थानीय जलप्रवाह बेहतर हो सकेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि नेपाल की 7 नदियां बिहार को तबाह करती हैं। इससे राज्य को हर साल 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होता है, लेकिन इस अहम समझौते से बिहार को काफी फायदा मिलेगा। बता दें कि बिहार को हर साल भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ता है।

असली परीक्षा जमीन पर होगी

बाढ़ और तलछट के बोझ से जूझते बिहार के लिए नदियों की गाद को बुनियादी ढांचे की रीढ़ बनाना एक महत्वाकांक्षी सोच है। कागज़ों पर यह नीति पर्यावरण संरक्षण, कृषि भूमि की सुरक्षा और किफायती निर्माण का बेहतरीन संगम दिखती है। लेकिन असली परीक्षा जमीन पर होगी, जब वैज्ञानिक मापदंडों, सख्त गुणवत्ता जांच और तय बजट के भीतर नदियों का पानी भी बहेगा और गाद से सड़कें भी मजबूत होंगी।

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