बाराबंकी : हेमतापुर में घाघरा का कहर , तिरपाल के नीचे जिंदगी, बांध पर बसे बाढ़ पीड़ित
करीब 30 परिवारों ने छोड़े घर, महिलाओं-बच्चों और बुजुर्गों के साथ बांध पर डेरा
सूरतगंज (बाराबंकी) ! हेतमापुर क्षेत्र में घाघरा नदी के बढ़े जलस्तर ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आधा दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। सुंदरनगर में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां करीब 30 परिवार घर छोड़कर बांध पर शरण लिए हुए हैं। जरूरी सामान समेटकर पहुंचे ग्रामीण तिरपाल के नीचे जिंदगी गुजार रहे हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यही तिरपाल फिलहाल घर की छत बन गई है।

घर छूटा तो बांध बना सहारा
पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए सुंदरनगर के ग्रामीणों ने घरों से निकलकर बांध पर सुरक्षित ठिकाना बनाया है। कोई राशन लेकर पहुंचा है तो कोई कपड़े और रोजमर्रा का सामान। परिवारों ने तिरपाल तानकर अस्थायी डेरा बना लिया है। दिन में उमस और रात में खुले वातावरण के बीच बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
इन परिवारों ने बांध पर ली शरण
मोहम्मद अहमद, मोहम्मद आलम, संजय, शेखर राजपूत, शेषकुमार, केशवराम, शिवांशु, जनकलाल, बंटू, इंशान अली, बाजपेई, चेतई बाबा, रामसहारे, दीपू, प्रीतम, कमलेश, संतोष, कौशल, हकीम, अनवर, कल्लू, कुंवारे राजपूत, सिंघा, रामसागर, मनोहर और कुंवारे चौहान समेत अन्य ग्रामीण बांध पर शरण लिए हुए हैं।
आधा दर्जन से अधिक गांव प्रभावित
हेतमापुर क्षेत्र में सुंदरनगर के अलावा कोड़री, ललपुरवा, बाबापुरवा, बलईपुर, सकतापुर, कोयली पुरवा, मदरहा और बेलाहरी समेत कई गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। गांवों के आसपास पानी भरने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक बीते दिन से पानी एक जगह ठहरा हुआ है और फिलहाल लगातार बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण खतरा बरकरार है।
■ राहत की निगाहें प्रशासन पर
बांध पर शरण लिए ग्रामीणों को अब प्रशासन से राहत और जरूरी सुविधाओं की उम्मीद है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पानी कम नहीं होता, तब तक अस्थायी ठिकाने पर ही रहना उनकी मजबूरी है।
तहसीलदार ने राहत केंद्र का किया निरीक्षण
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं। बुधवार को तहसीलदार विपुल सिंह ने बाढ़ राहत केंद्र और प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने राजस्व कर्मियों को अलर्ट रहने और बाढ़ प्रभावित परिवारों तक हरसंभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए। प्रशासन ने ग्रामीणों से नदी और बाढ़ के पानी के आसपास अनावश्यक रूप से न जाने की अपील की है।
फिलहाल पानी ठहरा , लेकिन खतरा बरकरार
घाघरा का पानी फिलहाल एक जगह ठहरा हुआ है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ग्रामीण लगातार नदी के जलस्तर पर नजर रखे हुए हैं। घर छोड़कर बांध पर पहुंचे परिवारों के लिए हर गुजरता घंटा इस उम्मीद में कट रहा है कि पानी जल्द उतरे और वे अपने घर लौट सकें।

