बाराबंकी : घाघरा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का खतरा गहराया , कछारवासी ग्रामीण चिंतित
सुंदरनगर समेत कई गांवों के निचले हिस्सों में पहुंचा पानी, घर छोड़ बंधे पर पहुंचे ग्रामीण

सूरतगंज(बाराबंकी) ! घाघरा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने हेतमापुर क्षेत्र में बाढ़ का संकट गहरा दिया है। नदी के उफान पर आने से किनारे बसे गांवों के निचले हिस्सों में पानी पहुंचने लगा है। सुंदरनगर, कोड़री, ललपुरवा, बाबापुरवा, बलईपुर, सकतापुर, कोयली पुरवा, मदरहा और बेलाहरी समेत कई गांवों में ग्रामीण बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं। सुंदरनगर में कई घरों में पानी घुसने के बाद ग्रामीण परिवार और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों तथा बंधे पर शरण लेने लगे हैं।

घरों में घुसा पानी, बंधे पर बना आशियाना
सुंदरनगर गांव में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बताए जा रहे हैं। कई घरों में पानी पहुंचने के बाद ग्रामीण जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। कई परिवार बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के साथ बंधे पर डेरा डाल चुके हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो गांव के अन्य हिस्से भी जल्द बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।ग्रामीणों मोहम्मद अहमद, मोहम्मद आलम, संजय, शेखर राजपूत, शेषकुमार, केशवराम, शिवांशु, जनलाल, बंटू, इंशान अली, चेतई बाबा, रामसहारे, दीपू, प्रीतम, कमलेश, संतोष, कौशल, हकीम, अनवर, कल्लू, कुंवारे राजपूत, सिंघा, रामसागर, मनोहर और कुंवारे चौहान समेत अन्य ने बताया कि पानी लगातार बढ़ रहा है। घरों में रहना मुश्किल होता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और बचाव के इंतजाम बढ़ाने की मांग की है।
खेतों में पानी, फसलों पर मंडराया संकट

बाढ़ का पानी गांवों के साथ खेतों तक भी पहुंचने लगा है। कई स्थानों पर खेत जलमग्न हो गए हैं, जिससे खड़ी फसलों के बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो फसलें नष्ट हो सकती हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।बाढ़ ने पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ उनके लिए चारे और पीने के पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। कई ग्रामीण अपने पशुओं को भी बंधे पर ले गए हैं।
रात में जलस्तर बढ़ने की आशंका से दहशत

ग्रामीणों को सबसे अधिक चिंता रात के समय अचानक पानी बढ़ने की है। उनका कहना है कि अंधेरे में पानी तेजी से बढ़ने पर बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। इसी आशंका के चलते कई परिवार पहले ही जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कराई जाए और नदी के जलस्तर में होने वाली बढ़ोतरी की जानकारी समय से उपलब्ध कराई जाए, ताकि लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकें।
प्रशासन अलर्ट, राहत सामग्री और भोजन की व्यवस्था
तहसीलदार विपुल सिंह ने बताया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। राहत शिविरों के साथ भोजन, पीने के पानी, दवाओं और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कराई जा रही है।उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के लिए भोजन का वितरण भी कराया जा रहा है। स्थिति और आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव कार्यों को और तेज किया जाएगा।फिलहाल घाघरा के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन की चुनौती यह है कि जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की स्थिति में प्रभावित परिवारों के साथ-साथ उनके मवेशियों को भी समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।

