योगी सरकार के एक फैसले से कई मौजूदा ग्राम प्रधान इस बार नहीं लड़ पाएंगे चुनाव


उत्तर प्रदेश सरकार ने सूबे के सभी गावों में ‘प्रधानी राज’ को बीते शुक्रवार को रात 12 बजे के बाद पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसी के चलते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले उत्तर प्रदेश के हर जिले की ग्राम पंचायतों की कमान अब विकास खंडों के एडीओ पंचायत को सौंप दी गई है। प्रधानों ने अपने कार्यकाल में सरकारी पैसे को कहां-कहां और कितना इस्तेमाल किया, इसके सत्यापन के लिए जिला पंचायत अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अनियमितता पर होगी कार्रवाई
ग्राम पंचायत में अब तक के कार्यकाल में ग्राम प्रधानों को आवंटित और 25 दिसंबर तक निकाली गई धनराशि से कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। इस कार्य के लिए जिला पंचायती राज अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप कर यह निर्देशित किया गया है कि वे टीम बनाकर ग्राम प्रधानों के कार्यकाल के दौरान कितनी धनराशि आवंटित की गई है और कितनी धनराशि निकालकर उनसे कितना विकास कार्य कराया गया है, इसका ब्योरा पेश करें।
सरकार की ओर से यह भी आदेशित किया गया है कि भौतिक सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित तत्कालीन ग्राम प्रधान के खिलाफ सुसंगत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संभव है कि गड़बड़ी पाए जाने के बाद संबंधित को ग्राम प्रधान चुनाव लड़ने से वंचित भी किया जा सकता है।

आवंटित धनराशि और विकास कार्यों का होगा मिलान
इस काम में जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम गठित कर ब्लॉकवार आहरित धनराशि की जांच की जाएगी। साथ ही धनराशि से कराए जा रहे कार्याें का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा। डीपीआरओ कार्यालय में भी किन-किन ग्राम प्रधानों को किस-किस मद में धनराशि भेजी गई है, उसके मिलान का कार्य किया जा रहा है। जिससे जिला स्तरीय टीम को भौतिक सत्यापन में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। यह कार्य पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले पूर्ण किया जाना है

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