अयोध्या : …तो मौत के बाद साक्ष्य मिटाने को तहस-नहस कर दी धनिया की खेती

फालोअप-संडवा गांव में हुई महिला की मौत का मामला

गीता ने पंद्रह साल लंबा अरसा पति से दूर रहकर गुजारी जिंदगी

छत की कुंडी में कपड़े फंसाना मृतका की ऊंचाई से नहीं दिख रहा संभव

मवई(अयोध्या) ! मवई के संडवा गांव में फंदे पर जिस महिला की लाश लटकती मिली। वह हत्या है या आत्महत्या। इसकी छानबीन फारेंसिक टीम ने घटनास्थल पर की। टीम ने एक-एक साक्ष्य जुटाने की कोशिश की। छानबीन के दरमियान एक बात हैरत कर देने वाली रही। घर के आंगन में एक कोने धनिया की खेती की गई थी। जिसे घटना वाले दिन कुदाल या किसी अन्य उपकरण से तहस-नहस पाई गई। इसके पीछे एक वजह साक्ष्य को मुटाने की भी हो सकती है। इस एंगल पर भी फारेंसिक टीम ने छानबीन की गई है। इतना ही नहीं आंगन के सीढ़ी पर रखा साबुनदान भी टूटा पड़ा मिला है। साथ ही एक बात गले नहीं उतर रही है कि जिस छत की कुंडी में कपड़े से फांसी लगा पाया गया। उसकी ऊंचाई बगल रखे मेज पर चढ़कर भी मृतका कपड़े को फंसा सके, कम संभव दिख रहा है। ऐसे में तमाम एंगलों पर जांच की जा रही है। हालांकि मृतका के पिता राजकरन यादव निवासी पकड़िया गांव ने पुलिस को दी गई तहरीर में बेटी की हत्या का आरोप मौसेरे भाइयों समेत मौसी पर इसलिए भी लगाया है। चूंकि दामाद से कई बार बेटी को खत्म मार देने की धमकी मिली थी। ताकि पिता के इकलौते भाई वेद प्रकाश की जमीन उन्हें मिल सके।

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गीता ने पंद्रह साल मायके में गुजारा

मृतका गीता ने पति की बुरी आदतों की वजह से पंद्रह साल तक ससुराल को त्याग रखा था। आखिरकार फिर वही हुआ, जिसका उसे शादी के बाद से ही अंदेशा रहा। मृतका की इकलौती बेटी भी पिता से खफा रही। यही वजह थी कि वह भी अपने ननिहाल में रह रही थी। मृतका के पिता राजकरन का आरोप है कि अब जब यहां सालभर पहले सुलह-समझौते के आधार पर रहने आई, तभी से मौसेरे भाइयों की नजर इनकी जमीन पर टेढ़ी रही।

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