बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं को BJP से जोड़ने की तैयारी, पार्टी ने बनायी ये योजना

हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में समाजवादी और बजुजन समाज पार्टी को मुंह की खानी पड़ी थी. ये दोनों दल इस हार से अभी उबर भी नहीं पाए थे कि बीजेपी (BJP) ने उनके बेस वोटबैंक पर अपनी नजरे जमा दी हैं. ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए साथ आये अखिलेश यादव और मायावती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

लोकसभा चुनाव के दौरान सपा का वोट बैंक माना जाने वाले मुस्लिम समुदाय को रिझाने की कवायद में बसपा देखी गयी. अब इन दो दलों की लड़ाई के बीच पर बीजेपी कूद पड़ी है. मुस्लिम महिलाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए बीजेपी ने बाकायदा चुने हुए विषयों को लेकर मुस्लिमों के बीच जाने का फैसला किया है. इसके जरिए प्रदेश की मुस्लिम महिलाओं को भरोसा दिलाया जाएगा कि उनकी हितचिंतक सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही है.

सदस्यता अभियान को लेकर तीन दिन पहले हुई बैठक में अल्पसंख्यक, विशेषकर मुस्लिम महिलाओं को अधिक से अधिक संख्या में भाजपा से जोड़ने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है. भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हैदर अब्बास चांद ने इस बारे में कहा, “भाजपा मुस्लिमों के लिए कभी अछूत नहीं रही है. हमने इस समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ा है. बड़ी संख्या में खुद लोग अब हमसे जुड़ रहे हैं. और भी लोगों को जोड़ने का निर्णय लिया गया है.”

चांद ने बताया, “तीन तलाक मुद्दा मुस्लिम महिलाओं को भाजपा के करीब लाने में काफी मददगार साबित हुआ. अन्य राज्यों में भी भाजपा मुसलमानों को प्रत्याशी बना चुकी है. इससे इस वर्ग को विश्वास हो गया है. भाजपा उनके भविष्य की चिंता कर रही है. लिहाजा हम सदस्यता अभियान के दौरान अपना मुख्य फोकस अल्पसंख्यक, विशेष कर मुस्लिम महिला वर्ग पर रखना चाहते हैं.” चांद ने बताया कि अशिक्षित महिलाओं और तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को जागरूक किया जाएगा और घर-घर जाकर मोदी सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के हित में चल रहीं योजनाओं के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाएगा.

उन्होंने बताया, “हमने एक जिले में 10 हजार मुस्लिम महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है. पूरे प्रदेश में लगभग पांच लाख मुस्लिम महिलाओं को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. यह अभियान छह जुलाई से चलाया जाना है. मेरे नेतृत्व में एक लाख 35 हजार नये सदस्य बने थे, जिसमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं.”

दरअसल लोकसभा चुनावों में यूपी में 62 सीटें जीतने वाली बीजेपी के वोट शेयर में तो वृद्धि हुई लेकिन उसे महज 284 विधानसभा क्षेत्रों में ही जीत हासिल हो सकी. जबकि 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी को 312 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी. पार्टी का मानना है कि 385 विधानसभाओं में वोट शेयर में वृद्धि के बावजूद 28 सीटों पर पार्टी का पिछड़ना चिंता का विषय है.

बीजेपी को 2014 में जहां करीब 17 करोड़ वोट मिले थे, वहीं इस बार 2019 में पांच करोड़ अधिक यानी 22 करोड़ वोट मिले हैं. बीजेपी के सूत्र बता रहे हैं कि आने वाले वक्त में बीजेपी केंद्र की तमाम योजनाओं को इन 22 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचने की तैयारी में है. फिलहाल दो करोड़ 20 लाख ही नए सदस्य जोड़े जाएंगे. मगर इसके बाद चरणवार तरीके से 22 करोड़ लाभार्थियों को भी बीजेपी सदस्य बनाना चाहती है. इसके लिए आगे प्लॉन बनेगा.

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